दो दिन बाद ओपीडी खुली और दवा देने वाला कोई नहीं

हल्द्वानी, अमृत विचार: लगातार दो दिन अवकाश होने की वजह से सरकारी अस्पताल बंद रहे। मंगलवार की सुबह से ही ओपीडी में मरीजों की भीड़ लग गई। इधर दवा वितरण काउंटर पर जब मरीज दवा लेने पहुंचे तो वहां कोई था ही नहीं। बाद में काफी देर तक केवल एक कर्मचारी दवा वितरण करने पहुंचा।
एसटीएच में प्रतिदिन करीब 2000 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों को निशुल्क दवा देने के लिए सुबह नौ बजे से काउंटर खोल दिए जाते हैं। हालांकि मरीज पहले ही पहुंच जाते हैं। मंगलवार की सुबह नौ बजे काउंटर खुला तो दवा देने वाला कोई नहीं था। पता चला कि सफाई की जा रही है। अभी समय लगेगा। मरीजों ने एतराज जताया तो एक कर्मचारी ने समझा दिया कि सफाई होने दें उसके बाद ही दवा मिलेगी। इधर करीब 9:25 बजे से दवाओं का वितरण शुरू हुआ।
काउंटर दो होने की वजह से कुछ लोग दूसरे काउंटर पर भी पहुंच गए तो बताया कि यहां अभी दवा नहीं दी जाएगी। दवा देने वाले कहीं गए हुए हैं। दो दिन बाद ओपीडी खुली और मरीजों की लंबी कतार रही और काफी देर तक एक ही कर्मचारी निशुल्क दवाओं का वितरण करते रहे जबकि एसटीएच में दवा काउंटर पर दो कर्मचारी भी भीड़ के सामने कम पड़ जाते हैं। इस मामले की जानकारी जब प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी को दी गई तो उन्होंने इसे देखने की बात कही।
नए वित्तीय वर्ष में भी शुरू नहीं हुआ यूपीआई से भुगतान
डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में बिलिंग घोटाला हुए करीब एक साल बीत गया है लेकिन अभी तक यूपीआई से भुगतान किया जाना शुरू नहीं किया गया है। बताया जाता है कि अस्पताल के एक विभाग के कर्मचारी की हठधर्मिता की वजह से ऐसा नहीं हो रहा है। पूरा अस्पताल प्रबंधन इस कर्मचारी के आगे बेबस नजर आ रहा है। ऐसा तब है जब बेस अस्पताल में यूपीआई से भुगतान किए जाने की सुविधा की जा रही है।