सीतापुर: चमत्कारी कुंड के भीतर है प्राचीन शिवलिंग, सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु की लगती है कतार

सीतापुर। इसे कुदरता का करिश्मा कहें या ईश्वर का चमत्कार। गहरे पानी में बेलपत्र डूब जाते हैं और फल तैरते हैं। जिसे श्रद्धालु प्रसाद मानकर गृहण करते हैं। हम बात कर रहे हैं नैमिषारण्य के रूद्रावर्त कुण्ड की। मान्यता है कि गोमती नदी के भीतर गुप्त शिवलिंग है, जो श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करते हैं। …
सीतापुर। इसे कुदरता का करिश्मा कहें या ईश्वर का चमत्कार। गहरे पानी में बेलपत्र डूब जाते हैं और फल तैरते हैं। जिसे श्रद्धालु प्रसाद मानकर गृहण करते हैं। हम बात कर रहे हैं नैमिषारण्य के रूद्रावर्त कुण्ड की। मान्यता है कि गोमती नदी के भीतर गुप्त शिवलिंग है, जो श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करते हैं।
यहां न जादू है और न ही कोई टोना। आस्था का सैलाब रोजाना सैकड़ों की संख्या में आकर देवदर्शन करता है। लखनऊ से करीब 90 किमी दूर पवित्र नैमिषारण्य में रूद्रावर्त कुण्ड है। ये गोमती नदी के किनारे है। मान्यता है कि मंदिर के भीतर एक शिवलिंग है जो नदी से प्रकट हुआ और दूसरा नदी के भीतर गुप्त लिंग है। इसी गुप्त लिंग पर नदी में बेलपत्र, दूध और प्रसाद के रूप में फल चढ़ाए जाते हैं।
बेलपत्र नीचे चले जाते हैं जबकि प्रसाद के रूप में चढ़ाए गए फल जैसे केला, अमरूद आदि ऊपर आ जाते हैं। मंदिर के प्रमुख बाबा श्रीरामदास की देवासन के बाद देखरेख कर रहे जिम्मेदारों का कहना है कि जिसकी मनोकामना पूर्ण होती है, उसका प्रसाद पानी के ऊपर आ जाता है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्वालुओं का आना होता है, लेकिन सावन के महीने में यह संख्या बढ़ जाती है।
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