बरेली: आइजट की तीन पीढ़ियों के योगदान से कहलाया इज्जतनगर

बरेली: आइजट की तीन पीढ़ियों के योगदान से कहलाया इज्जतनगर

बरेली,अमृत विचार। रेलवे के इतिहास में आइजट की तीन पीढियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यही वजह है कि पूर्वोत्तर रेलवे के तीन मंडलों में से एक इज्जतनगर का नामकरण उनके नाम पर हुआ है। इसके अलावा वाराणसी-इलाहाबाद लाइन पर इलाहाबाद में गंगानदी पर बने पुल को भी इज्जतपुल कहा जाता है। इसी कड़ी में प्रथम …

बरेली,अमृत विचार। रेलवे के इतिहास में आइजट की तीन पीढियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यही वजह है कि पूर्वोत्तर रेलवे के तीन मंडलों में से एक इज्जतनगर का नामकरण उनके नाम पर हुआ है। इसके अलावा वाराणसी-इलाहाबाद लाइन पर इलाहाबाद में गंगानदी पर बने पुल को भी इज्जतपुल कहा जाता है।

इसी कड़ी में प्रथम अलैक्जेंडर आइजट बीएनडब्ल्यूआर के 1883 से 1904 तक द्वितीय एजेंट रहे। इस अवधि में ही छपरा, सीवान और गाेरखपुर होते हुए सोनपुर से लखनऊ तक मुख्य लाइन बिछाई गई। लेफ्टिनेंट कर्नल डब्ल्यू. आर. आइजट, जो ए.आइजट के बेटे थे, 1920 से 1927 तक एजेंट रहे।

बी.एन.डब्ल्यू.आर. (बंगाल नार्थ वेस्टर्न रेलवे) के एजेंट रहे। उनके बेटे सर जे.रोनी आइजेट 1941 से 1944 तक बीएनडब्ल्यूआर के एजेंट रहे उन्हीं के कार्यकाल में अवध तिरहुत रेलवे सन 1942 अस्तित्व में आई वे 1944 तक प्रथम एजेंट रहे। पिता-पुत्र-पौत्र की तिकड़ी ने 131 सालों की अवधि तक रेलवे की सेवा की। यह साल पूर्वोत्तर रेलवे के निर्माण के महत्वपूर्ण वर्ष थे।

यह समय अवधि पूर्वोत्तर रेलवे के इतिहास का अतिभाज्य कालखंड है। इज्जतनगर मंडल 1 मई, 1969 को अस्तित्व में आया। यह मंडल उत्तर प्रदेश के 14 जिलों बरेली बदायू, एटा, मथुरा, महामाया नगर (हाथरस), फर्रूखाबाद, कन्नौज, काशीराम नगर, कानपुर, शाहजहांपुर, लखीमपुर, पीलीभीत, रामपुर, मुरादाबाद और उत्तराखंड राज्य के छह जिलों नैनीताल, उधमसिह नगर, बागेश्वर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा एवं चम्पावत को रेल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराता आ रहा है। वर्तमान में इज्जतनगर मंडल का कुल रेलपथ 1018.11 किमी है जिसमें मीटरगेज लाइन 69.14 किमी और बड़ी लाइन 948.97 किमी है।

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