न्यायिक कार्य से विरत हैं अधिवक्ता, न्यायाधीशों के लिए कही ये बात
.jpg)
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के निर्णय पर शुक्रवार को अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हैं। गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की बैठक में इसका निर्णय लिया गया था। एसोसिएशन की कार्यकारिणी समिति की बैठक नए पदाधिकारियों के कक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित हुई थी।
बैठक के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉ. डी.वाई.चंद्रचूड़ के बयान का हवाला देते हुए निर्णय लिया गया कि अधिवक्ता अब न्यायाधीशों को "माई लॉर्ड" या "योर लॉर्डशिप" जैसे संबोधनों से संबोधित नहीं करेंगे बल्कि बहस के दौरान सर कहेंगे। मालूम हो कि मुख्य न्यायाधीश ने अपने बयान में कहा था कि न्यायाधीशों को खुद को भगवान नहीं समझना चाहिए। इसके अलावा कार्य बहिष्कार के निर्णय का पालन न करने वाले अधिवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण न देने की स्थिति में उनकी बार सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। इससे वे मिलने वाली चिकित्सीय सहायता, मृतक सदस्यों के आश्रितों को सहायता और नए कक्षों के आवंटन में प्राथमिकता जैसी सुविधाओं से वंचित हो जाएंगे। इसके साथ ही जिन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, वह भविष्य में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की सदस्यता के लिए स्थायी रूप से अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगे, साथ ही जो अधिवक्ता कार्य बहिष्कार के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या व्यक्तिगत रूप से मामलों में भाग लेंगे, उनकी सदस्यता तुरंत रद्द कर दी जाएगी। इसको लेकर अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हैं।
ये भी पढ़ें -सेबी ने सहारा पर की बड़ी कार्रवाई, निदेशक, प्रमोटर व प्रबंधकों के अकाउंट किए अटैच