पीलीभीत: सब गोलमाल है! 27 लाख के टेंडर में इस्तेमाल हो रहे पालिका के संसाधन..प्रतिदिन खर्च किया जा रहा 100 लीटर डीजल

पीलीभीत, अमृत विचार। मानसून की दस्तक नजदीक है। शहर को डूबने से बचाने के लिए नगरपालिका की ओर से कराए जा रहे काम अभी भी सुस्त चाल ही है। जिम्मेदारों की सख्ती का असर धरातल पर काम में लगाए गए कर्मचारियों पर नहीं दिख रहा है। नाला सफाई कराने के लिए 27 लाख रुपये का टेंडर निकाला गया, लेकिन इसके बाद भी पालिका के ही संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है। सफाई और सिल्ट का उठान में पालिका के संसाधन इस्तेमाल हो रहे हैं। फिलहाल जिम्मेदार इसे लेकर पड़ताल कराने की बात कह रहे हैं। साथ ही सफाई विभाग से इसकी जानकारी मांगी है।
बारिश में हर साल शहर के प्रमुख इलाकों में रहने वाली बड़ी आबादी बाढ़ जैसा संकट झेलती है। बरसात से पहले नगरपालिका की ओर से बातों और वादों का मौसम आता है। ये वादे होते हैं नालों की तली झाड़ सफाई कराने के..। फिर जब बरसात शुरू होती है तो ये वादे भी बरसात के पानी में बह जाते हैं। बीते कई सालों से नाला सफाई होने के बाद भी शहर के आधे हिस्से में जलभराव रहता है। इस बार मानसून से पहले नगरपालिका नालों की तलीझाड़ सफाई का दावा कर रही है। शहर में 38 नाले निकलते हैं। इनमें छह नाले बड़े है, जबकि 32 छोटे हैं। इन छह नालों में तीन नालों का पानी देवहा नदी में गिरने वाले नाले में जाता है।
जिनकी सफाई का जिम्मा नगरपालिका पर है। इस बार भी मानसून आने से चंद दिन पहले नगरपालिका की ओर से नालों का टेंडर निकाला गया। यह टेंडर ग्लैक्सी इंटरप्राइजेज फर्म को दिया गया है। नाला सफाई करने के लिए नगरपालिका की ओर से 27 लाख रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है। टेंडर होने के बाद ठेकेदार ने नाले की सफाई शुरू कर दी है। शहर में सबसे पहले गैस चौराहा से स्टेशन रोड तक के नाले की सफाई कराई गई। इसके बाद गांधी स्टेडियम रोड वालों की नालों की सफाई कर सिल्ट को निकाला गया। टेंडर के दौरान शर्ते होती है कि कार्यदायी संस्था नाला सफाई के दौरान निकलने वाली सिल्ट का भी उठान कराएंगी। लेकिन यहां ठेकेदारी गुपचुप तरीके से नगरपालिका के ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी मशीन लगाकर सिल्ट का उठान करा रहा है, जोकि नियमानुसार नहीं बताया जा रहा।
सिल्ट उठाने में प्रतिदिन ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी मशीन ठेकेदार के काम पर चल रही है। सोमवार रात को स्टेशन रोड से लक्ष्मी टॉकीज तक नालों की निकाली गई सिल्ट का उठान नगरपालिका के संसाधनों से कराया जा रहा है। इसमें डीजल का खर्च नगरपालिका का हो रहा है। जब इसकी जानकारी चेयरमैन से ली गई तो उन्होंने बताया कि अगर ऐसा हो रहा है,तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ठेकेदार अपने वाहनों से ही सिल्ट का उठान कराएगा। अगर उसे इमरजेंसी में वाहन की जरुरत पड़ेगी। तो उसे नगरपालिका को किराया देय करना होगा।
प्रतिदिन 100 डीजल का हो रहा खर्च
नालों से निकाली गई सिल्ट का उठान करने के लिए नगरपालिका के दो ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी का प्रयोग किया जा रहा है। जिसमें नगरपालिका का प्रतिदिन 100 लीटर डीजल खपाया जा रहा है। जेसीबी मशीन की बात करें तो अगर मशीन एक घंटे तक चलती है तो उसमें प्रति घंटा 7 से 8 लीटर डीजल का खर्च आता है। अगर लोड अधिक रहता है तो डीजल की मात्र और अधिक हो जाती है। इसी तरह ट्रैक्टर-ट्रॉली प्रति घंटा लोड होने पर तीन से पांच लीटर का खर्च आता है। यह वाहन कम से कम पांच से छह घंटे तक लगातार काम कर रहे हैं। जिसमें करीब 100 लीटर डीजल का खर्च आ रहा है। जिस वजह से प्रतिदिन 8835 रुपये का नुकसान नगरपालिका को पहुंचाया जा रहा है। जो सीधे तौर पर वित्तीय अनिमित्ताओं में आता है।
तलीझाड़ का दावा, सफाई दो फुट तक नहीं
नगरपालिका की ओर से निकाले गए नाला सफाई टेंडर में तलीझाड़ सफाई करने का दावा किया जा रहा है। मगर कार्यदायी संस्था की ओर से नगरपालिका को तलीझाड़ के नाम पर चूना लगाया जा रहा है। अब तक जितने भी नाले साफ किए गए हैं। वह तलीझाड़ तो दूर की बात उन नालों में सिर्फ दो से तीन फिट तक ही सिल्ट निकाली गई। बाकी सिल्ट नाले में ऐसे ही छोड़ दी गई है। ठेकेदार के श्रमिक नाला सफाई के नाम पर ऊपर-ऊपर दिखने वाली गंदगी को साफ कर रहे हैं। जो बरसात के मौसम में पालिका के लिए मुसीबत बन सकती है। बीते दिनों मोहल्ला डालचंद में बने नाले की तलीझाड़ सफाई कराई जाने का दावा किया गया था। मगर बीते दिनों रात में हुई बारिश के दौरान जलभराव हो गया था। इसी तरह अन्य नालों में भी ठेकेदार की ओर से नालों की तलीझाड़ सफाई में सिर्फ रस्म अदायगी की जा रही है। जिस पर पालिका प्रशासन आंखे मूंदे बैठा है।
नगरपालिका की ओर से सफाई का टेंडर कराया गया है। जिसमें ठेकदार को नाला सफाई कराने के साथ ही सिल्ट का उठान करना होगा। पालिका की ओर से कोई वाहन नहीं दिया जा रहा है। पहले पालिका की ओर से कुछ नालों की सफाई कराई गई है। सिल्ट उठान में अगर पालिका के वाहनों का प्रयोग होने का मामला संज्ञान में नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। फिलहाल ठेकेदार इमरजेंसी में वाहन की मांग करेगा तो उसे वाहन का किराया और डीजल देय करना होगा। किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं की जा रही है। - डॉ. आस्था अग्रवाल, चेयरमैन नगरपालिका पीलीभीत