बरेली: 10 मीटर से नहीं चलेगा काम, भविष्य बनाने को चाहिए 25 से 50 मीटर शूटिंग रेंज

राकेश शर्मा, बरेली। केंद्र सरकार खेलो इंडिया अभियान चलाकर उन 16 खेलों को बढ़ावा दे रही है जो प्रतिस्पर्धा की चकाचौंध में पिछड़ गये या फिर स्थानीय स्तर पर अनदेखी की भेंट चढ़ गये। इसमें शूटिंग (निशानेबाजी) भी शामिल है। बरेली में शूटिंग में सैकड़ों युवा भविष्य तलाश रहे हैं। स्कूलों और अन्य प्राइवेट शूटिंग …
राकेश शर्मा, बरेली। केंद्र सरकार खेलो इंडिया अभियान चलाकर उन 16 खेलों को बढ़ावा दे रही है जो प्रतिस्पर्धा की चकाचौंध में पिछड़ गये या फिर स्थानीय स्तर पर अनदेखी की भेंट चढ़ गये। इसमें शूटिंग (निशानेबाजी) भी शामिल है। बरेली में शूटिंग में सैकड़ों युवा भविष्य तलाश रहे हैं। स्कूलों और अन्य प्राइवेट शूटिंग रेंज में प्रशिक्षण भी ले रहे हैं लेकिन हर जगह 10 मीटर शूटिंग रेंज से अधिक रेंज नहीं है। इसलिए उनके सपनों को पंख नहीं लग पा रहे हैं।
रायफल क्लब में जो 10 मीटर की शूटिंग रेंज बनाई गई है वह भी मैनुअल टारगेट पर चल रही है। करीब 15 साल से मैनुअल टारगेट पर शूटिंग की बेसिक जानकारी समझने के बाद जो युवा आर्थिक रूप से मजबूत हैं वे मेरठ और दिल्ली चले जाते हैं लेकिन उनके सपने दम तोड़ ददेते हैं। जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है उन्हें सपने पूरे करने के लिए बरेली में ओलंपिक की तैयारियों जैसा माहौल नहीं मिला है।
राइफल क्लब में आज 25 से 50 मीटर की शूटिंग रेंज की जरूरत है। मैनुअल टारगेट को बदलकर इलेक्ट्रानिक टारगेट वाली मशीनें भी जरूरी हैं। आउटडोर शूटिंग रेंज भी फिलहाल युवाओं के लिए सपना ही है। इसके लिए जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिये। रायफल क्लब का परिसर यूपी के अन्य राइफल क्लबों से बढ़ा है।
25 या 50 मीटर शूटिंग रेंज की मांग कर चुके हैं शूटर
रायफल क्लब में 25 या 50 मीटर की शूटिंग रेंज शुरू कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज कई बार अपनी मांग प्रशासन के समक्ष उठा चुके हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रयास नहीं किये गये। इंटरनेशनल शूटर कमल सेन कहते हैं कि युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कहां तक पहुंचे, इस पर अधिकारियों को ध्यान देना चाहिये। रायफल क्लब में नयी टेक्नोलॉजी की रायफल या पिस्टल भी मंगायी जानी चाहिये। जिस पद्धति पर युवा शूटिंग का बेसिक समझ रहे हैं वह पुरानी हो चुकी है। राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के लिए बदलाव जरूरी है।
निशाना साधने वाले हथियारों को लग गई जंक
रायफल क्लब की शूटिंग रेंज में युवा जिन पिस्टल या राइफल से निशाना साधते हैं। वे चलन से बाहर बहुत पहले हो चुके हैं। अलमारियों में रखे रहने की वजह से जंक तक आ गयी है। इन हथियारों का रखरखाव ठीक नहीं है।
फ्लाइंग शूटिंग के लिये भी है पर्याप्त जगह
रायफल क्लब में फ्लाइंग शूटिंग के लिये भी पर्याप्त स्थान है। फ्लाइंग शूटिंग का मतलब ऊपर उछाली गयी चीज पर निशाना लगाना। इसके लिए क्लब के परिसर में कई साल पहले कोट भी तैयार किया गया। प्लेटफार्म भी बनाया गया लेकिन घास में सब छिप गया है। फ्लाइंग शूटिंग के लिये नये सिरे से इंतजाम करने की जरूरत है।
क्या कहते हैं बरेली के शूटर
बरेली में निशानेबाजी में भविष्य बनाने वाले युवाओं की कमी नहीं है। मैंने भी राष्ट्रीय फलक पर पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष किया है। 10 मीटर रेंज में शूटिंग का अभ्यास शुरू करते हुए लक्ष्य पर निशाना लगाते हुए आगे बढ़ती गयी। कड़ी मेहनत करके 25 मीटर यानि .22 स्पोर्ट्स पिस्टल की राष्ट्रीय स्तर की शूटर बनीं। आज परिस्थितियां बदल गयी हैं। बरेली शहर में 25 और 50 मीटर की शूटिंग रेंज की बेहद जरूरत है। बहेड़ी, बरेली के कई युवाओं को वह प्रशिक्षण दे रही हैं लेकिन नेशनल प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने के लिए खिलाड़ियों को मेरठ, दिल्ली, लखनऊ जैसा माहौला देने की जरूरत है। -नेहा, राष्ट्रीय शूटर
15 साल पहले एक-दो शूटर ही राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचते थे। वर्तमान में सौ से अधिक शूटर नेशनल खेल रहे हैं लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। रायफल क्लब की 10 मीटर की रेंज से बेसिक समझने के बाद सभी शूटरों ने अपने खर्च पर बड़े-बड़े शहरों में अभ्यास किया है। रायफल क्लब में मैनुअल टारगेट पर युवा शूटिंग कर रहे हैं लेकिन आज इलेक्ट्रानिक टारगेट की जरूरत है। क्लब के परिसर में आउटडोर शूटिंग रेंज बनाने के लिए पर्याप्त भूमि है। प्रशासन को इसके लिये प्रयास करना चाहिये। –कमल सेन, इंटरनेशनल शूटर
केंद्र सरकार खेलो इंडिया का स्लोगन देकर खेलों को बढ़ावा दे रही है लेकिन बरेली में शूटिंग को बढ़ावा देने की जरूरत है। बरेली रायफल क्लब में शूटिंग रेंज निरंतर चालू नहीं रहती है। काफी समय से शूटिंग रेंज में ताला लटका था। यहां शूटिंग के लिए जो उपकरण लगे हैं वे एक तरह से वर्तमान के लक्ष्य को भेदने के लिए नाकाफी हैं। राष्ट्रीय शूटर तैयार करने के लिए नये उपकरणों लगाने के साथ 25 और 50 मीटर की रेंज तैयार करनी बेहद जरूरी है। स्थानीय प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों को भी शूटिंग को बढ़ावा देने के आगे आने की जरूरत है। -देवव्रत, शूटिंग कोच