बरेली: पीडब्ल्यूडी का एक ओर कमाल...एक और फर्म को कर दिया मालामाल

बरेली, अमृत विचार: पीडब्ल्यूडी के खेल का एक और मामला सामने आया है। जिला जेल के बाहर गार्ड रूम का निर्माण एक ठेकेदार से कराया गया। 50 फीसदी काम होने के बाद उसका ठेका दूसरे जिले की एक फर्म को देकर भुगतान कर दिया गया। ठेकेदार ने मुख्य अभियंता से शिकायत की है। वहीं एक्सईएन इस ठेकेदार के कोई काम न करने की बात कह रहे हैं।
वर्ष 2021-22 में पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड ने जिला कारागार परिसर में बंदियों की बैरक में शौचालय और पार्टीशन वॉल का टेंडर निकाला था। एक फर्म को इस काम की जिम्मेदारी दी गई। जेल के सख्त नियमों की वजह से आठ महीने के बजाय काम पूरा होने में लगभग दो साल लग गए। ठेकेदार शिव कुमार के मुताबिक यह काम 31 दिसंबर 2023 को पूरा हुआ।
इसी दौरान जेल के बाहर गार्ड रूम बनाने के लिए एक टेंडर निकाला गया। सिंगल टेंडर आने की वजह से इसे निरस्त करना पड़ा। बाद में यह कार्य भी उनको सौंप दिया गया। भुगतान के बाबत कहा गया कि बैरक में शौचालय और पार्टीशन वॉल आदि के भुगतान के साथ ही अतिरिक्त कार्य दर्शाकर इसका भुगतान भी कर दिया जाएगा।
शिव कुमार के मुताबिक करीब 50 फीसदी काम होने के बाद निर्माणाधीन गार्ड रूम का नया टेंडर निकाल दिया गया। करीब 12 लाख रुपये का ठेका एक फर्म को दे दिया। वहीं उन्हें आश्वस्त किया कि जो काम हो चुका है उसका भुगतान संबंधित फर्म से करा दिया जाएगा। लेकिन अब तक दोनों कामों का भुगतान नहीं हो सका।
ठेकेदार का आरोप, एक्सईएन ने दी सफाई: ठेकेदार शिव कुमार के म़ुताबिक टेंडर की शर्तों के मुताबिक जेल परिसर में सभी काम पूरा कर दिए। करीब 68 लाख रुपये खर्च हुए। अब परेशान किया जा रहा है। एक फरवरी को बैरक परिसर में सफाई आदि कराने के लिए नोटिस भेजा गया। जेल के बाहर गार्ड रूम के भुगतान पर चुप्पी साध ली गई।
वहीं, एक्सईएन संजीव कुमार ने ठेकेदार के आरोपों को गलत बताया। कहा कि गार्ड रूम का निर्माण कराने के लिए नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी। ठेकेदार ने गार्ड रूम में किसी तरह का निर्माण नहीं कराया है। हालांकि ठेकेदार का तर्क है कि कराए गए कार्य के सभी फुटेज सीसीटीवी में हैं। उसने साक्ष्यों के साथ मुख्य अभियंता को शिकायती पत्र भेज जांच कराने की मांग की है।
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