मुरादाबाद : नारी सशक्तिकरण की प्रबल समर्थक हैं रजनी सिंह, बोलीं- बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाकर बनाएं आत्मनिर्भर

मुरादाबाद : नारी सशक्तिकरण की प्रबल समर्थक हैं रजनी सिंह, बोलीं- बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाकर बनाएं आत्मनिर्भर

रजनी सिंह, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत पाकबड़ा

पाकबड़ा (मुरादाबाद), अमृत विचार। बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ की संकल्पना को साकार करने की सोच रखने वाली नगर पंचायत पाकबड़ा की अधिशासी अधिकारी रजनी सिंह नारी सशक्तिकरण की प्रबल पक्षधर हैं। उनका मानना है कि यदि बेटियों को उच्च शिक्षा और परिवार व समाज में उचित सम्मान मिले तो वह अपने दम पर शिखर छू सकती हैं।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में जन्मी रजनी सिंह की शुरू से ही पढ़ाई में रूचि अधिक थी। उनका मन पढ़ाई में अधिक लगता था। हर क्लास में वह अग्रणी रहीं। उन्होंने हाई स्कूल केंद्रीय विद्यालय से किया। इंटरमीडियट, बीएससी, एमएससी एवं बीएड की पढ़ाई उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों से अपने पिता की तैनाती के दौरान अलग अलग स्थानों से की। उनके पिता एसपी सिंह मत्स्य विभाग पूर्वोत्तर में डायरेक्टर के पद पर रहे। रजनी की अधिकांश पढ़ाई पूर्वोत्तर में ही हुई है। पहले उन्होंने केंद्रीय विद्यालय में परीक्षा पास कर शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। लेकिन मन इससे संतुष्ट नहीं था इसलिए ज्वाइन नहीं किया। उससे भी आगे बढ़ने की ठान कर दृढ़ निश्चय से लोअर पीसीएस की परीक्षा 2009 में उत्तीर्ण की।

2015 में ज्वाइन की नौकरी, बदायूं जिले में पाई तैनाती
रजनी ने 2015 में नौकरी ज्वाइन की तो पहली तैनाती बदायूं जिले के इस्लामनगर में अधिशासी अधिकारी के रुप में मिली। कई साल यहां काम करने के बाद बरेली के रिच्छा में अगली तैनाती हुई। तीसरी तैनाती पर वह पाकबड़ा नगर पंचायत में अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनकी शादी 2015 में दिल्ली में हुई।

बेटियों की पढ़ाई पर अभिभावक दें अधिक ध्यान
रजनी का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा पढ़ना चाहिए। आमतौर पर लोग बेटा-बेटी को दोनों को पढ़ा रहे हैं। लेकिन मेरा मानना है कि कुछ लोग बेटियों की पढ़ाई पर कम ध्यान देते हैं। उन्हें बेटियों की शिक्षा पर अधिक जोर देना चाहिए। क्योंकि शिक्षा से ही उनके अंदर छिपी प्रतिभा को निखारा जा सकता है। आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी सफलता से देश का नाम रोशन कर रही हैं। वह मानती हैं कि बेटियां खुद पढ़ने के साथ ही दो परिवार ही नहीं पूरे समाज को शिक्षित करने में अपना योगदान देती हैं।

पढ़ाई के लिए उम्र का बंधन नहीं
उनका मानना है कि पढ़ाई में उम्र की कोई सीमा नहीं होती है। आप शादी के बाद भी पढ़ाई करें। इससे पीछे न हटें। परिवार वालों को हमेशा बेटियों की शिक्षा का समर्थन करना चाहिए। जब परिवार पूरा समर्थन करता है तब ही समाज भी उसका साथ देता है। बेटियों को आगे बढ़ने से कभी न रोकें। उसके अंदर छिपी प्रतिभा को उभरने का अवसर दें। अगर शादी के बाद मां भी किसी भी उम्र में पढ़ाई करेगी तो समझिए बच्चे उससे ज्यादा पढ़ाई करने के लिए प्रभावित होंगे।

बेटियों के मन को समझें
बेटियों की रुचि जिस तरह की शिक्षा में हो उसे उस दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। न कि उसे दूसरी शिक्षा माध्यम का बोझ डालकर उस पर थोपें नहीं। मन के अनुसार पढ़ाई का अवसर न मिलने से अंदर छिपी प्रतिभा को निखरने का अवसर नहीं मिलता है। इसलिए बेटियों के मन को समझें।

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