तीर्थ पुरोहितों की एकता के कारण देवस्थानम बोर्ड एक्ट हुआ वापस: पाठक

मथुरा। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड एक्ट को मंजूरी उत्तराखण्ड के तीर्थ पुरोहितों एवं उन्हें सहयोग करनेवाले देश के विभिन्न प्रांतों के तीर्थ पुरोहितों की एकता की जीत है। आगे भी रही ऐसी एकता तो मिलेगी और सफलता उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि तीर्थ …
मथुरा। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड एक्ट को मंजूरी उत्तराखण्ड के तीर्थ पुरोहितों एवं उन्हें सहयोग करनेवाले देश के विभिन्न प्रांतों के तीर्थ पुरोहितों की एकता की जीत है।
आगे भी रही ऐसी एकता तो मिलेगी और सफलता
उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि तीर्थ पुरोहित इस प्रकार की एकता भविष्य में भी बनाए रखेंगे जिससे भारतीय संस्कृति और मन्दिर संस्कृति पर कुठाराघात करने के बारे में कोई सोंच न सके। पाठक ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में देश के विभिन्न तीर्थस्थल के पुरोहितों से इस प्रकरण से सीख लेते हुए आपसी एकता बनाये रखने की अपील की है और कहा है कि ऐसा इसलिए भी आवश्यक है जिससे मन्दिर संस्कृति को अक्ष्युण्य बनाए रखा जा सके।
पुरोहितों ने पुष्कर सिंह धामी को दिया धन्यवाद
उन्होंने इस बिल को वापस लेने के लिए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को साधुवाद देते हुए उन्होंने इस काले कानून को वापस लेने और फिर विधानसभा से अपने आदेश को पारित कराने को एक सही और सुविचारित कदम बताया है।
उन्होने कहा कि धामी के मुख्यमंत्री बनने के बाद वे एक प्रतिनिधि मण्डल के साथ उनसे मिले थे तथा उनसे इस काले कानून को वापस लेने और पुरानी व्यवस्था को बहाल करने का अनुरोध किया था जिसे स्वीकार करते हुए उन्होंने बिल को वापस लेने की चरणबद्ध तरीके से प्रक्रिया अपनाई और उत्तराखण्ड के मन्दिरों की प्राचीन व्यवस्था को वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कैबिनेट की बैठक में वैष्णोदेवी श्राइनबोर्ड की तर्ज पर देवस्थानम बोर्ड की व्यवस्थाओं को करने के इस काले कानून को न केवल स्वीकृत कराया था बल्कि दिसम्बर 2019 को वहां की विधानसभा से पारित कराकर इसे कानूनी शक्ल देने का प्रयास किया था।
इस बिल के खिलाफ उत्तराखण्ड के तीर्थ पुरोहित नवम्बर 2019 से तब से आंदोलनरत थे जब से तीर्थ पुरोहितों को तत्कालीन मुख्यमंत्री रावत के कदम की जानकारी हुई थी। इस कानून को वापस लेने के बाद केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री , यमुनोत्री समेत उत्तराखण्ड के चार दर्जन से अधिक मन्दिरों के संचालन की व्यवस्था तीर्थ पुरोहितों के हाथ में एक बार फिर से आ गई है।
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