बरेली: कालागढ़ से आयी चेतावनी, रामगंगा के बहाव क्षेत्र से हटवाएं अतिक्रमण

बरेली, अमृत विचार। रामगंगा बांध मंडल कालागढ़ से चेतावनी जारी की गयी कि यदि रामगंगा नदी के बहाव एरिया से अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो बांध से पानी छोड़ने पर बाढ़ आएगी। बरेली, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, अमरोहा, रामपुर और फर्रुखाबाद के जिलाधिकारियों को अवगत कराते हुए बताया है कि लोगों द्वारा नदी के बहाव क्षेत्र …

बरेली, अमृत विचार। रामगंगा बांध मंडल कालागढ़ से चेतावनी जारी की गयी कि यदि रामगंगा नदी के बहाव एरिया से अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो बांध से पानी छोड़ने पर बाढ़ आएगी। बरेली, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, अमरोहा, रामपुर और फर्रुखाबाद के जिलाधिकारियों को अवगत कराते हुए बताया है कि लोगों द्वारा नदी के बहाव क्षेत्र में खेती एवं आबादी का विस्तार कर लिया गया है।

नदी के तलहटी क्षेत्र में भी खेती करके नदी के बहाव क्षेत्र में व्यापक रूप से अवरोध उत्पन्न किया हुआ है। इसका असर रामगंगा पर पड़ रहा है। कई बार नदी के बहाव क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रदेश स्तर पर अधिकारियों ने चर्चा की लेकिन सरकारों ने रामगंगा नदी के कब्जे वाले बहाव को कब्जामुक्त नहीं करा पाये। कालागढ़ के अधीक्षण अभियंता ने पत्र जारी कर जिलाधिकारियों से कहा है कि सभी अपने-अपने क्षेत्र में मानसून में बाढ़ से सुरक्षा के समस्त प्रबंध पूर्ण कर लें।

रामगंगा नदी क्षेत्र के बाढ़ से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों को समय पर सूचना देकर उनको नदी के प्रभावी क्षेत्र से समयपूर्व ही हटा दिया जाए। जिससे किसी प्रकार की जन-धन आदि की हानि न हो सके। शांति एवं कानून व्यवस्था भंग होने की भी आशंका न रहे। रामगंगा जलाशय का अधिकतम जलस्तर 365.30 मीटर है। जलस्तर 355 मीटर होने पर आवश्यकता के अनुसार जल की निकासी प्रभावी की जा सकती है। इस क्रम में रामगंगा जलाशय जलस्तर 355 मीटर होने पर इसकी सूचना तुरंत आपको दी जाएगी।

ताकि बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र में आपके स्तर से बाढ़ सुरक्षा की व्यवस्था पुख्ता कर ली जाए। इसके अतिरिक्त तकनीकी जरूरत के दृष्टिगत भी जलाशय से पानी छोड़ने की आवश्यकता हो सकती है। यह भी बताया कि 2020 में रामगंगा जलाशय का 358.900 मीटर तक भरा जा सकता था।

पूर्व में भी खतरनाक हो चुकी हैं स्थितियां
बताया कि 1978 के सितंबर माह में पहली बार रामगंगा बांध से पानी छोड़ने पर बाढ़ आयी थी। उसके बाद 1990, वर्ष 1998 और 2020 में रामगंगा जलाशय अपनी पूर्ण क्षमता तक भर गया था। वर्ष 2010 के वर्षाकाल में 18 सितंबर को रामगंगा जलाशय का जलस्तर 363.600 मीटर पहुंच गया था। यह स्थिति भयानक थी। रामगंगा जलाशय के जल संग्रहण क्षेत्र में अतिवृष्टि के कारण 19 सितंबर 2010 से करीब दो लाख क्यूसेक जल रामगंगा नदी में बांध से नीचे छोड़ा गया था। वर्ष 2011 में भी जलस्तर बढ़ने पर हानि हुई थी।

बांध से छोड़े जाने वाले संभावित पानी की मात्रा

प्रवाह की सीमा                                                      बाढ़ का प्रकार

  • 25 हजार क्यूसेक से 75 हजार क्यूसेक तक                निम्न बाढ़
  • 75 हजार क्यूसेक से 1.25 लाख क्यूसेक तक              मध्यम बाढ़
  • 1.25 लाख क्यूसेक से 1.75 लाख क्यूसेक तक             उच्च बाढ़
  • 1.75 लाख क्यूसेक से ऊपर अत्यंत                            उच्च बाढ़