Ganga Mela 2025: ऐतिहासिक गंगा मेला में बिखेरी सांस्कृतिक विविधता, सैकड़ों सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने कैंप लगा गुलाल उड़ाया
भोजपुरी गीत-संगीत सुनने को जुटी भारी भीड़

कानपुर, अमृत विचार। होली पर करीब 84 साल से चली आ रही गंगा मेला की परम्परा कायम है। हजारों कनपुरियों ने कचहरी चौराहे से सरसैया घाट तक लगने वाले गंगा मेला में शिरकत की। हाईटेक युग और महानगरीय जीवन की कश्मकश के बीच भी भारी संख्या में लोगों की भागीदारी ने गंगा मेला की परम्परा बनाए रखने का संदेश दिया। वैचारिक मतभेद के बाद भी राजनेता एक दूसरे से मिलते जुलते रहे। सामाजिक और जातीय संगठनों ने सांस्कृतिक विविधता की छठा बिखेरी।
गुरुवार शाम सरसैया घाट विभिन्न राजनीतिक दलों, समाजसेवी संस्थाओं, संगठनों आदि के शिविर लगे। चौराहे पर ही भक्ति संगीत का रस कानों में घोलने वाली मण्डली आगंतुकों का स्वागत कर रही थी। सामने मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच पूजा अर्चना हो रही थी।
मेले में खानपान, खिलौने की दुकानें और बच्चों के लिए झूले भी लगाए गए। समाजवादियों के टोले में पूर्व मंत्री शिवकुमार बेरिया, पूर्व विधायक मुनींद्र शुक्ला, संतोष द्विवेदी, लोकदल नेता सुरेश गुप्ता, पूर्व विधायक नेकचंद्र पांडे आदि दर्जनों लीडर लोगों से होली मिलते रहे।
ब्राह्मण, वैश्य, पिछड़ी जातियों आदि संगठनों के कैम्पों में चहल पहल दिखायी दी। सांसद रमेश अवस्थी, विधायक नीलिमा कटियार, सुरेंद्र मैथानी, सलिल विश्नोई, महेश त्रिवेदी, अमिताभ वाजपेयी, हमन रूमी, पूर्व सांसद सत्यदेव पचौरी, पूर्व विधायक भूधरनारायण मिश्रा आपस में गले मिलते देखे गए। कांग्रेस, सपा, कम्युनिस्ट पार्टी के कैंप में गले मिलने और हल्के मूड में सियासी चुटकियां ली जाती रहीं।
इस्कॉन से जुड़े लोग हरे रामा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे रामा की धुन पर समूह में नृत्य करते हुए आकर्षण का केंद्र बने थे। स्मृति और सुमिरन संस्था के राजेंद्र मिश्रा बब्बू और आकर्षण तिवारी से कला संस्कृति के लोगों को मिलते देखा गया।
वकीलों के मुख्तलिफ संगठनों ने भी कैम्प लगाए थे। सोशलिस्ट पार्टी के कैम्प में मैगसेसे से पुरस्कृत संदीप पांडे की उपस्थिति रही। असित कुमार सिंह, मीनाक्षी सिंह भी थीं। पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी, नगर निगम के कैम्प लगे। संघ परिवार के कैम्प में भाजपा नेताओं की चहलकदमी दिखायी पड़ी। पत्रकार संगठनों के करीब एक दर्जन कैम्प थे।