बरेली: सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में फिर गूंजेंगे वैदिक मंत्र

बरेली, अमृत विचार। देवभाषा संस्कृत विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इन विद्यालयों में संविदा पर नियुक्ति करने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं। इससे एक बार फिर से इन विद्यालयों के संचालित होने की उम्मीद जगी है और इनमें फिर से वैदिक मंत्र गूंजेंगे। भर्ती प्रक्रिया को …
बरेली, अमृत विचार। देवभाषा संस्कृत विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इन विद्यालयों में संविदा पर नियुक्ति करने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं। इससे एक बार फिर से इन विद्यालयों के संचालित होने की उम्मीद जगी है और इनमें फिर से वैदिक मंत्र गूंजेंगे।
भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए जिला स्तर पर एक समिति बनाई जाएगी जिसमें सहायता प्राप्त विद्यालय के प्रबंधक को अध्यक्ष बनाया जाएगा। जिलाधिकारी द्वारा नामित अधिकारी को सदस्य बनाया जाएगा। जिलाविद्यालय निरीक्षक को सदस्य सचिव बनाया जाएगा।
मंडलीय उपनिरीक्षक संस्कृत पाठ्शालाएं को सदस्य और सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी द्वारा नामित दो विशेषज्ञ को सदस्य बनाया जाएगा। जिससे कई वर्षो से बंद पड़े स्कूलों को खोला जाएगा। इन स्कूलों में संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। जिला विद्यालय निरीक्षक डा. अमरकान्त सिंह ने बताया कि जिलें में संस्कृत के दो सहायता प्राप्त विद्यालय हैं जो शिक्षकों की कमी सें बंद पड़े थे। इन स्कूलों में जल्द ही संविदा पर शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। जिससे इन स्कूलों में फिर से वैदिक मंत्र गूंजेगें।
छात्र- छात्राओं की संस्कृत के प्रति उदासीनता बनी कारण
शहर में संस्कृत के दो एडेड स्कूल हैं। जिनमें एक रामगंगा में श्रीमती जयदेवी संस्कृत माध्यमिक विद्यालय और दूसरा श्री बृज मोहन लाल स्मारक आयुर्वेदिक संस्कृत विद्यालय हैं। दोनों शिक्षकों के अभाव में बदं पड़ है। इन विद्यालयों में शुरूआत में तो शिक्षक थे और छात्रों की संख्या अच्छी थी लेकिन बाद में छात्र संस्कृत पढ़ने में कम रूचि दिखा रहे थे। कम छात्र होने के कारण इन स्कूलों के शिक्षकों का मानदेय रोक दिया जाता था। जिससे शिक्षकों को दिक्कत का सामना करना पड़ता था। धीरे- धीरे इन विद्यालयों में शिक्षक सेवानिवृत्त होने लगे उसके बाद से इन स्कूलों में शिक्षकों की निुयुक्ति नहीं हुई जिससे कारण यह स्कूल लंबे समय से बंद पड़े हैं।
35 साल पहले हुई थीं नियुक्तियां
संस्कृत विद्यालय पूर्व में धर्मार्थ कार्य के लिए स्थापित किए जाते थे। इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को धर्म कर्म की शिक्षा दी जाती थी लेकिन अब नई पीढ़ी संस्कृत विद्यालयों में पढ़ना नहीं चाहती है। जिससे इन विद्यालयों की दशा भी खराब हो चुकी है। इन विद्यालयों में करीब 35 साल पहले नियुक्तियां हुई थीं। अब इन विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं है। इन विद्यालयों को मैनेजमेंट ने बद कर दिया था। ऐसें में इन विद्यालयों के लिए एक बार फिर से उम्मीद जगी है।