बरेली: संक्रमण काल में संस्थागत प्रसव योजना का बंटाधार, अस्पतालों से तीन गुना घरों में हुए प्रसव

बरेली, अमृत विचार। प्रसव के दौरान गर्भवती और नवजात के जीवन को कोई संकट न हो, इसके लिए शासन-प्रशासन से जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वहीं कई सरकारी योजनाएं भी चल रही हैं लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने योजनाओं का बंटाधार कर दिया। …
बरेली, अमृत विचार। प्रसव के दौरान गर्भवती और नवजात के जीवन को कोई संकट न हो, इसके लिए शासन-प्रशासन से जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वहीं कई सरकारी योजनाएं भी चल रही हैं लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने योजनाओं का बंटाधार कर दिया। संक्रमण की दूसरी लहर का कहर अप्रैल और मई में रहा।
करीब 45 दिनों तक चिकित्सा सेवा बेपटरी रही। दावा था कि गर्भवतियों की जांच और प्रसव के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं हैं मगर आंकड़े बताते हैं कि महामारी के चलते संस्थागत प्रसव काफी कम हुए। कोरोना संक्रमण की आशंका से कुछ गर्भवतियों के परिजन ने घर को अस्पताल से ज्यादा सुरक्षित समझा।
यहीं कारण है कि सरकारी और निजी अस्पतालों की अपेक्षा घरों पर तीन गुना से अधिक प्रसव होने से विभागीय अधिकारी भी हैरान हैं। अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में प्रसव के दौरान संक्रमित होने की आशंका से घरों में प्रसवों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
कोरोना की पहली लहर में निजी अस्पतालों में गर्भवती के सिजेरियन या सामान्य प्रसव कराने पर भी हजारों का बिल वसूला गया। वहीं कुछ निजी अस्पतालों ने संक्रमण की आशंका से प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवतियों को गेट से ही वापस लौटा दिया। समय पर इलाज न मिलने से पिछले साल एक गर्भवती की तो मौत भी हो गई थी।
कोरोना की दूसरी लहर के और ज्यादा घातक होने से लोगों के मन में इस कदर डर बैठ गया कि उन्होंने घर पर ही प्रसव कराना ज्यादा सुरक्षित समझा। अप्रैल से जून में तीन गुना से अधिक प्रसव घरों में हुए। आंकड़ों पर गौर करें तो इन दो महीने में 3,542 प्रसव घरों पर हुए, जबकि पिछले साल इस अवधि में घरों पर 1,386 बच्चों का जन्म हुआ था।
सरकारी-निजी अस्पतालों में प्रसव के आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग में दर्ज संस्थागत प्रसव के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल अप्रैल-जून में सरकारी अस्पतालों में 2866 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 378 प्रसव सिजेरियन ऑपरेशन से हुए। निजी अस्पतालों में 2224 प्रसवों में 1231 सिजेरियन ऑपरेशन से हुए। घर पर हुए प्रसव की बात करें तो 3,542 बच्चों ने घर पर जन्म लिया। इनमें से कुछ की हालत बिगड़ी तो एंबुलेंस को कॉल की गई। अप्रैल-जून में 32 सुरक्षित प्रसव एंबुलेंस में हुए थे।
तीन साल में अप्रैल-मई में प्रसव की तुलना
वर्ष संस्थागत घरेलू प्रसव
2019 8491 2710
2020 4847 1386
2021 5090 3542
(नोट: स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी और निजी अस्पतालों में हुए प्रसव।)
सीएमओ डा. सुधीर गर्ग ने बताया कि घरों में अधिक प्रसव कराने की वजह कोरोना संक्रमण को माना जा सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवतियों के लिए चिकित्सा सेवाओं में कोई कमी नहीं की। आशा कार्यकर्ता को गांवों में ही रुकने के निर्देश दिए गए, ताकि वे लोगों को संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूक कर सकें।