बरेली: रिटर्न न जमा करने पर दो हजार फर्मों की आईडी ब्लाक

बरेली: रिटर्न न जमा करने पर दो हजार फर्मों की आईडी ब्लाक

बरेली, अमृत विचार। शासन के निर्देश पर कोरोना काल में वाणिज्यकर विभाग का अभियान ठप रहा तो लोगों ने इसका भरपूर फायदा उठाया। रिटर्न भरना ही छोड़ दिया। इन पर विभाग ने शिकंजा कसा है। रिटर्न न भरने वाली मंडल की दो हजार फर्मों की आईडी ब्लाक कर दी गई है। विभागीय कर्मी बताते हैं …

बरेली, अमृत विचार। शासन के निर्देश पर कोरोना काल में वाणिज्यकर विभाग का अभियान ठप रहा तो लोगों ने इसका भरपूर फायदा उठाया। रिटर्न भरना ही छोड़ दिया। इन पर विभाग ने शिकंजा कसा है। रिटर्न न भरने वाली मंडल की दो हजार फर्मों की आईडी ब्लाक कर दी गई है। विभागीय कर्मी बताते हैं कि इन फर्मों ने वाणिज्यकर विभाग में पंजीकरण तो कराया था लेकिन संबंधित संचालकों ने समय पर रिटर्न दाखिल करने की सुध नहीं ली। जांच के लिए गई टीम को कई फर्मों के कार्य स्थल भी गलत मिले, जिसके बाद इनकी आईडी ब्लाक कर दी।

जानकार बताते हैं कि रिटर्न भरने को तमाम व्यापारी ई वे बिल फार्म का दुरुपयोग करने के लिए दूसरे के नाम व पते पर फर्म बना लेते हैं और कार्य सिद्ध होने पर उन्हें बंद दिखा देते हैं। एक अमीन की मानें तो उन्हें जिन फर्मों से बकाया वसूलने की सूची दी जाती है, उनमें बीस प्रतिशत फर्मों का कार्य स्थल व व्यापारी का पता मौके पर नहीं मिलता है। ऐसे में विभाग दो तिमाही का रिटर्न न भरने वाली फर्मों की आईडी बंद कर देता है।

वर्तमान में मंडल के बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर जिले में करीब पचास हजार फर्में पंजीकृत हैं। इनमें बरेली में करीब 17 हजार फर्में पंजीकृत हैं। वाणिज्य कर विभाग ने बीते एक साल से रिटर्न न भरने वाली दो हजार फर्मों की आईडी ब्लाक कर दी है, ताकि वे ई वे बिल का दुरुपयोग न कर सकें।

वाणिज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर गौरीशंकर ने कहा कि जो व्यापारी सिर्फ कर की चोरी करने के उद्देश्य से पंजीकरण करा लेते हैं, उन पर विशेष नजर रखी जा रही है। ऐसे व्यापारियों को दोबारा पंजीकरण नहीं दिया जाए, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। वहीं कोरोना संक्रमण कम होते ही एक बार फिर शासन के निर्देश पर बिना पंजीकरण व्यापार करने वाले प्रतिष्ठानों की सर्वे कराया जाएगा।

नोटिस भी किया जा चुका है जारी
कोरोना काल में भले ही वाणिज्यकर विभाग का अभियान थमा रहा हो, लेकिन इससे पहले विभाग की तरफ से कराई गई जांच में बड़ी संख्या में 2017-18 में रिटर्न दाखिल न करने वाले व्यापारियों को नोटिस भेजा गया था। इनमें 50 फीसदी मामले अब भी लंबित बताए जा रहे हैं। कई लोगों ने विभाग को नोटिस का जवाब भी भेजा है, जिसमें व्यापार न होने की दशा में रिर्टन दाखिल नहीं करने की बात कही गई है।

आठ हजार से अधिक किए ई वे बिल स्कैन
वाणिज्यकर विभाग के अनुसार वाहन से एक से दूसरे स्थान पर माल ले जाने के लिए ई वे बिल जरूरी है। ऑनलाइन निकलने वाले ई वे बिल का व्यापारी दोबारा प्रयोग नहीं कर सकें, इसके लिए वाणिज्य कर सचल दल वाहनों की चेकिंग के दौरान उनको मोबाइल पर स्कैन कर लेते हैं। ऐसे में अगर ई वे बिल का दोबारा प्रयोग होता है तो वह खामी तुरंत पकड़ में जाती है। बरेली जोन के सचल दल अधिकारियों ने करीब एक साल में आठ हजार ई वे बिल स्कैन किए, जिनमें 132 से अधिक मामले दोबारा ई वे बिल के प्रयोग के पकड़े गए।