बरेली: कलाकारों को रास नहीं आ रही मुख्यमंत्री की माटी कला योजना

बरेली, अमृत विचार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शुमार माटीकला योजना कलाकारों को रास नहीं आ रही है। आलम यह है योजना के लाभ पाने को 10 माह में सिर्फ 18 लोगों ने ही आवेदन किए। अफसरों का दावा है तमाम कोशिशों के बाद भी योजना का लाभ लेने के लिए माटी कलाकार या …

बरेली, अमृत विचार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शुमार माटीकला योजना कलाकारों को रास नहीं आ रही है। आलम यह है योजना के लाभ पाने को 10 माह में सिर्फ 18 लोगों ने ही आवेदन किए। अफसरों का दावा है तमाम कोशिशों के बाद भी योजना का लाभ लेने के लिए माटी कलाकार या अन्य लाभार्थी नहीं मिल रहे हैं।

विभागीय कर्मी बताते हैं जिले में बड़े मॉल और शोरूम पर आधारित बाजार होने की वजह से माटी आधारित उत्पाद पर ब्रेक लग गया है। इससे कुम्हारों की स्थिति दयनीय है। इसके चलते सरकार ने कुम्हारों, परंपरागत कारीगरों, उद्यमियों और शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री माटी कला योजना शुरू की थी।

मंशा थी योजना से जुड़कर घरेलू उपयोग के सामान (खिलौने, घड़ा, सुराही, जग, कुल्हड़, गिलास, कटोरी, अचारदानी, कप, प्लेट्स, डोंगे) और भवन निर्माण सामग्री (फ्लोर टायल्स, रूफ टायल्स, पाइप, वॉश वेशिन, सजावटी सामान, गुलदस्ता, गार्डन पार्ट्स, बोनसाई पार्ट्स, लैंप्स) आदि के उद्योग स्थापित कर उद्यमी आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

लेकिन यह योजना धरताल पर फेल होती नजर आ रही है। यह आलम तब है जब योजना में 10 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट पर बैंक से ऋण का प्रावधान है। इसमें प्रोजेक्ट लागत का पांच प्रतिशत उद्यमी अंशदान और 95 प्रतिशत लोन मिलेगा जो पांच वर्ष में नियम के अनुसार वापस करना होगा।

एडीओ ग्रामोद्योग विभाग बीसी वंशीवाल के मुताबिक योजना का उद्देश्य व्यक्तिगत इकाइयां स्थापित कराना है। 10 महीने में 18 आवेदन हुए। विभाग की ओर से इन्हें स्वीकृति के लिए संबंधित बैंक भेजा जा चुका है। इनमें तीन को उद्यम स्थापित करने की मंजूरी बैंक से मिल चुकी है।

प्रचार-प्रसार पर जोर, फिर भी नहीं मिल रहे लाभार्थी
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली इस योजना के तहत माटी कलाकारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है वहीं ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारी बताते हैं योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों को दिलाने के लिए गांव-गांव प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है। योजना के प्रति लोग दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।