हल्द्वानी: ‘निजी भूमि पर पेड़ काटना चाहते हैं तो रोपने होंगे दोगुने पौधे’
हल्द्वानी, अमृत विचार। जिस तरह भी हो जंगल को बचाना चाहिए।इसी को ध्यान में रखते हुए जंगलात ने निजी भूमि पर पेड़ काटने की अनुमति के लिए न केवल दोगुने पौधे रोपने बल्कि पांच साल तक देखभाल करने की भी शर्त लगा दी है। ताकि हरियाली को बचाया और बढ़ाया जा सके। वन अधिकारियों के …
हल्द्वानी, अमृत विचार। जिस तरह भी हो जंगल को बचाना चाहिए।इसी को ध्यान में रखते हुए जंगलात ने निजी भूमि पर पेड़ काटने की अनुमति के लिए न केवल दोगुने पौधे रोपने बल्कि पांच साल तक देखभाल करने की भी शर्त लगा दी है। ताकि हरियाली को बचाया और बढ़ाया जा सके।
वन अधिकारियों के अनुसार यदि काश्तकार को निजी भूमि पर पेड़ काटना होता था तो वह कागजी औपचारिकाताएं पूरी कर पेड़ काटने की अनुमति लेता था। इधर वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 में हरियाली बचाने और बढ़ाने के लिए कायदे कानून बना दिए हैं। निजी भूमि पर पेड़ काटने के लिए किसान को काटे गए पेड़ों की दोगुनी संख्या के पौधे रोपने होंगे। यदि काश्तकार के पास भूमि नहीं है तो वन पंचायत में रोप सकता है। इसके लिए वन विभाग को प्रति पौधा रोपण शुल्क 200 रुपया बतौर जमानत राशि देना होगा। इसी के साथ ही पांच साल तक पौधों की देखभाल करनी होगी। पांच साल में पौधे के पनपने के बाद यह जमानत राशि काश्तकार को वापस कर दी जाएगी। इसका मकसद काश्तकार को बिना आर्थिक नुकसान पहुंचाए पेड़ों का संरक्षण व संवर्द्धन करना है क्योंकि जमानत राशि के लिए काश्तकार भी पौधों की देखभाल करेगा।
पहले 100 रुपए लिए जाता था शुल्क
वन विभाग पूर्व में प्रति पौध रोपण राशि 100 रुपए वसूलता था। बाद में वन विभाग ने शुल्क बढ़ा कर दोगुना कर दिया है। अब नए नियमानुसार काश्तकार को प्रति पौध रोपण शुल्क 200 रुपए देना होगा।
वृक्ष संरक्षण एक्ट 1976 में अब काश्तकार को प्रति पौध रोपण शुल्क 200 रुपया देना होगा। पांच साल तक पौधों की देखभाल करनी होगी। इसके बाद यह शुल्क जो बतौर जमानत राशि लिया जाएगा वापस कर दिया जाएगा। इसका मकसद वनों का संरक्षण एवं संवर्द्धन है।
-जीवन चंद्र जोशी, वन संरक्षक, पश्चिमी वन वृत्त हल्द्वानी