मस्जिद के सामने से क्यों नहीं निकल सकती शोभायात्रा, CM ने भरे सदन में तमतमाए चेहरे के साथ पूछा सीधा सवाल

संभल पर बोले, नमाज के पहले जो तकरीरें दी गईं, उसके बाद खराब हुआ माहौल

मस्जिद के सामने से क्यों नहीं निकल सकती शोभायात्रा, CM ने भरे सदन में तमतमाए चेहरे के साथ पूछा सीधा सवाल

दो टूक कहा, भारत में राम-कृष्ण व बुद्ध की परंपरा ही रहेगी, बाबर, औरंगजेब की नहीं

लखनऊ,अमृत विचार। राज्य विधानसभा में सोमवार को उस पल सन्नाटा पसर गया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने तीखे तेवर के साथ सीधे-सपाट शब्दों में पूछा कि, मुस्लिम बाहुल्य इलाकों या मस्जिद के सामने से हिंदुओं की शोभायात्रा क्यों नहीं निकल सकती? जय श्रीराम का उद्घोष क्यों नहीं? हमारे जुलूसों में भगवा झण्डा क्यों न लगे, धार्मिक संगीत क्यों न बजे? इसी क्रम में योगी ने कहा, मोहर्रम का जुलूस भी मंदिरों, हिंदू आबादी के सामने से निकलता है, कोई आपत्ति नहीं होती फिर मुस्लिम बस्तियों में ही दंगे क्यों होते हैं?

शीतकालीन सत्र के पहले दिन योगी आदित्यनाथ संभल और बहराइच हिंसा पर विपक्ष के उठाए सवालों का जवाब दे रहे थे। मुख्यमंत्री ने भरे सदन तमतमाए चेहरे के साथ दो टूक कहा, भारत में राम-कृष्ण व बुद्ध की परंपरा ही रहेगी, बाबर, औरंगजेब की नहीं। संभल पर बोले, जुमे की नमाज के पहले और बाद में जो तकरीरें दी गईं, उसके बाद माहौल खराब हुआ। बोले, याद रखना, जिसने पत्थरबाजी की होगी, जिसने माहौल खराब किया होगा, उनमें से एक भी बचने वाला नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायालय के आदेश का पालन करना प्रशासन का दायित्व है। प्रशासन संभल में वही कर रहा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए सपा सदस्यों से कहा कि मंदिर को न छेड़कर आपने बड़ी कृपा कर दी, लेकिन 22 कुओं को किसने पाट दिया। आखिर मूर्तियां कैसे मिल रही हैं। नोटिस से परेशानी क्यों हो रही है। योगी यहीं नहीं रुके बोले, संभल में तुर्क व पठान का विवाद चल रहा है। शफीकुर्रहमान बर्क (सपा के पूर्व सांसद- स्व.) खुद को भारत का नागरिक नहीं, बल्कि बाबर का संतान कहते थे। आपको तय करना है कि आक्रांताओं को अपना आदर्श मानते हैं या राम-कृष्ण, बुद्ध की परंपरा को।

विष्णु का दसवां अवतार संभल में होगा

मुख्यमंत्री के अनुसार, बाबर नामा भी कहता है कि हरिहर मंदिर को तोड़कर ढांचा खड़ा किया गया। पुराण भी कहता है कि श्रीहरि विष्णु का दसवां अवतार संभल में होगा। न्यायालय के निर्देश पर 19 नवंबर, 21 नवंबर व 24 नवंबर को सर्वे कार्य चल रहा था। सर्वे के दौरान पहले दो दिन शांतिभंग नहीं हुई। 23 नवंबर को जुमे की नमाज के पहले और दौरान जिस प्रकार की तकरीरें दी गईं, उसके बाद माहौल खराब हुआ, उसके बाद की स्थितियां सबके सामने हैं। हमारी सरकार ने पहले ही कहा है कि हम ज्यूडिशियल एक्ट बनाएंगे, जो एक्ट के अंदर बना है। सदन में उसकी रिपोर्ट आएगी, तब दूध का दूध, पानी का पानी होगा।

निर्दोष हिंदुओं के लिए दो शब्द मुंह से नहीं निकले

योगी ने कहा कि 1947 से अब तक संभल में 209 हिंदुओं की हत्या हुई और एक भी बार निर्दोष हिंदुओं के लिए दो शब्द नहीं कहे। घड़ियाली आंसू बहाने वाले लोग निर्दोष हिंदुओं केबारे में दो शब्द नहीं कहे। 1978 में जो दंगा हुआ, एक वैश्य ने सबको पैसा उधार दे रखा था। दंगा होने केबाद हिंदू उनके घर में एकत्र होते हैं, उन्हें घेर लिया जाता है और उनसे कहा जाता है कि इन हाथों से पैसा मांगोगे, इसलिए पहले हाथ, फिर पैर, फिर गला काट दिया जाता है। सौहार्द की बात करने पर इन्हें शर्म नहीं आती है।

योगी आदित्यनाथ के उद्बोधन की पांच खास बातें

- जयश्रीराम सांप्रदायिक संबोधन नहीं है, नीयत सभी लोग समझ सकते हैं
- मूल संविधान में कहीं भी धर्मनिरपेक्ष, पंथनिरपेक्ष या समाजवाद शब्द नहीं
- 40 लाख करोड़ रु. के निवेश का प्रस्ताव, उप्र. में शांति का प्रतीक है
- बुलडोजर की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अंजाम दिया
- विपक्ष के लोग गन प्वाइंट पर संवैधानिक संस्थाओं से बात मनवाना चाहते हैं

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