निगरानी बढ़ाई जाए

निगरानी बढ़ाई जाए

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एमपॉक्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। चिंता की बात है कि दो वर्षों में यह दूसरी बार है जब एमपॉक्स को वैश्विक आपातकाल घोषित किया गया है। अफ्रीकी देशों में आतंक मचाने के बाद यह वायरस स्वीडन और फिर पड़ोसी देश पाकिस्तान तक पहुंच चुका है। अभी भारत में इस वायरस का असर नहीं दिख रहा है लेकिन चिंताएं बढ़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एमपॉक्स की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

भारत के लिए जोखिम का आंकलन करने के लिए 12 अगस्त को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) द्वारा विशेषज्ञों की एक बैठक बुलाई गई थी। एनसीडीसी द्वारा पहले जारी किए गए एमपॉक्स पर एक संक्रामक रोग अलर्ट को नए घटनाक्रमों का पता लगाने के लिए अद्यतन किया जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर स्वास्थ्य टीमों को संवेदनशील बनाया गया है। 2022 में एमपॉक्स का वैश्विक प्रकोप हुआ और भारत समेत कई देश इससे प्रभावित हुए।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2022 से वैश्विक स्तर पर 116 देशों से एमपॉक्स के कारण 99,176 मामले और 208 मौतें दर्ज की गई थीं। कांगो में एमपॉक्स के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले साल, रिपोर्ट किए गए मामलों में काफी वृद्धि हुई और इस साल अब तक दर्ज किए गए मामलों की संख्या पिछले साल की कुल संख्या से अधिक हो गई है, जिसमें 15, 600 से अधिक मामले और 537 मौतें शामिल हैं।

2022 में अंतर्राष्ट्रीय चिंता से जुड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद से भारत में 30 मामले सामने आए। एमपॉक्स का आखिरी मामला मार्च 2024 में पता चला था। एमपॉक्स की पहचान पहली बार 1950 के दशक में अनुसंधान प्रयोगशालाओं में बंदरों में की गई थी, इंसान में इसका पहला मामला 1970 में ही पता चला था। डर यह है कि यह वायरस विकसित हो सकता है। 

यह वायरस श्वसन संक्रमण विकसित कर सकता है और घातक हो सकता है। इसे रोकने का सबसे अच्छा तरीका संक्रमण की संख्या को कम करना, इसे वर्तमान भौगोलिक क्षेत्र में सीमित रखना और धीरे-धीरे इसे खत्म करना है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत को एमपॉक्स वायरस को समझने के लिए जीनोमिक निगरानी पर फोकस करना चाहिए और इसके प्रसार को रोकने के तरीके विकसित करने चाहिए।

इससे पहले कि यह प्रकोप तेजी से पश्चिमी देशों और अन्य स्थानों पर फैल जाए, हमें प्रकोप को दबाने और सामूहिक प्रतिरक्षा में सुधार करने की आवश्यकता है। एमपॉक्स वायरस की रोकथाम में मामलों का तेजी से पता लगाना महत्वपूर्ण है। वायरल प्रकोप को रोकने के लिए दुनिया को एकजुट और सावधानी से आगे बढ़ने की जरूरत है।