Loksabha election 2024: करिश्माई नेता मेनका गांधी को मिली तीसरी बार शिकस्त

मनोज कुमार मिश्र/ सुलतानपुर, अमृत विचार। आखिरकार पर्यावरण प्रेमी व कद्दावर नेता मेनका संजय गांधी का विजय रथ एक बार फिर रुक गया। सियासी जीवन में यह उनकी तीसरी शिकस्त है। पहली बार उन्हें अपने ज्येष्ठ स्व. राजीव गांधी से शिकस्त का मुंह देखना पड़ा था, जबकि तीसरी बार वे मंगलवार को सपा के राम भुआल निषाद से चुनाव हार गईं। अब तक 11 चुनाव लड़ चुकीं मेनका गांधी कुल आठ बार सांसद निर्वाचित हो चुकी हैं। सात बार से वे लगातार सांसद हैं।
मेनका गांधी देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गांधी की बहू और संजय गांधी की पत्नी है। एक आकस्मिक दुर्घटना में संजय गांधी के देहान्त के बाद वे सन 1982 में राजनीति में आयीं। उन्होंने अपना पहला चुनाव अमेठी संसदीय सीट से अपने ज्येष्ठ राजीव गांधी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी (संजय विचार मंच) के रूप में लड़ा और करारी हार का सामना करना पड़ा। 1988 में उन्होंने वीपी सिंह का जनता दल ज्वाइन किया और इसकी महासचिव बनीं। 1989 में मेनका ने पहली बार पीलीभीत से चुनाव जीता और पर्यावरण राज्यमंत्री बनीं। लेकिन उन्हें 1991 के संसदीय चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। 1996 में फिर पीलीभीत संसदीय सीट से जनता दल के प्रत्याशी के रूप कामयाब हुई। 1998, 1999, में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पीलीभीत संसदीय सीट से कामयाब होकर संसद पहुंचने में सफल रही। 1998-99 में वह राज्यमंत्री (सोशल जस्टिस और इमपावरमेंट-स्वतंत्र प्रभार) रहीं। 2004 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गयीं और 2004 में पीलीभीत से तो 2009 में आंवला से, 2014 में फिर पीलीभीत से तो 2019 में सुलतानपुर संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में संसद पहुंचने में कामयाब हुई। 2019 में बेटे वरुण की सीट से यहां चुनाव लड़ने आई तो उनको सपा-बसपा के गठबंधन उम्मीदवार चंद्रभद्र सिंह सोनू ने कड़ी टक्कर दी। बसपा उम्मीदवार सोनू को 4,44,670 मत प्राप्त हुए तो मेनका गांधी 4,59,196 वोट पाकर विजय प्राप्त की थी।
अपने करिश्माई कामों की वजह से जनता के दिलों पर राज करने वाली मेनका संजय गांधी मंगलवार को आए नतीजों में हार गई। उन्हें गठबंधन से सपा उम्मीदवार राम भुआल निषाद ने शिकस्त दी। इस चुनाव में राम भुआल को 4,44,330 मत प्राप्त हुए, जबकि रनर रही मेनका गांधी को 4,01,156 मतों से संतोष करना पड़ा। इस हिसाब से राम भुआल ने 43,174 मतों से चुनाव जीत लिया।
पढ़िए ये आंकड़े -
- 1984ः अमेठी (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से राजीव गांधी से 2.7 लाख वोटों से हार गए, एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मेनका गांधी चुनाव लड़ी थी
- 1989ः पीलीभीत (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से जनता दल पार्टी के टिकट पर लोकसभा सदस्य चुनी गई
- 1991ः पीलीभीत में जनता दल के उम्मीदवार के रूप में भाजपा के परशुराम से हारे
- 1996ः पीलीभीत (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से जनता दल पार्टी के टिकट पर लोकसभा सदस्य चुने गए
- 1998ः पीलीभीत (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से लोकसभा सदस्य, एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुने गए
- 1999ः पीलीभीत (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से लोकसभा सदस्य, एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुने गए
- 2004ः पीलीभीत (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा सदस्य चुने गए
- 2009- आंवला (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा सदस्य चुने गए
- 2014ः पीलीभीत (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा सदस्य चुने गए
- 2019ः सुलतानपुर (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से लोकसभा सदस्य , भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर निर्वाचित।
- 2024ः सुलतानपुर लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर सपा से पराजित हुई
मेनका के हार के अब निकाले जा रहे कारण
मेनका गांधी के हार के कई कारण बताए जा रहे हैं। हाईप्रोफाइल वाली नेता मेनका गांधी को पार्टी के कुछ नेताओं की नाराजगी का अंदरखाने दगा पाने की कीमत चुकानी पड़ी है। डा. घनश्याम तिवारी हत्याकांड में उनकी तरफ से की गई लेटलतीफी भी एक हद तक ब्राह्मण वोटों के बिखराव का कारण बना है। बेस वोट बैंक निषाद-कुर्मी व अदर बैकवर्ड को जातीय ध्रुवीकरण में न साध पाना भी हार का मुख्य कारण है। अंतिम समय में जिले की सियासत में अहम रोल अदा करने वाले भद्र बंधुओं का सपा ज्वाइन करना एक वर्ग का वोट बैंक खिसकना भी उनकी हार की वजह बनी है। साथ ही उनके साथ रहने वाले कुछ अहम लोगों का पार्टी के वरिष्ठ नेता व पदाधिकारियों का नजरंदाज करना भी महंगा पड़ा है।
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