बरेली: ई-वेइंग मशीनों के डर से दुकानें सरेंडर करने लगे कोटेदार, दो ने दिया इस्तीफा

अगले महीने से जिले में लागू होगी ई-वेइंग मशीनों से राशन वितरण की व्यवस्था

बरेली: ई-वेइंग मशीनों के डर से दुकानें सरेंडर करने लगे कोटेदार, दो ने दिया इस्तीफा
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बरेली, अमृत विचार। घटतौली से होने वाला मुनाफा कोटे की दुकानें हासिल करने के लिए होने वाली मारामारी की प्रमुख वजह था लेकिन माना जा रहा है कि ई-वेइंग मशीन के जरिए राशन वितरण की व्यवस्था लागू होने के बाद यह खेल खत्म हो जाएगा। इससे कोटेदारों में खलबली मची हुई है। नौबत यह है कि कोटेदारों ने अपनी दुकानें सरेंडर करनी शुरू कर दी हैं। दो कोटेदारों ने हाल ही में दुकानें सरेंडर की हैं, करीब 50 दुकानें और सरेंडर होने की आशंका जताई जा रही है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन का वितरण इसी महीने से ई-वेइंग मशीनों से कराने की तैयारी है। ई-पॉस मशीनों को ई-वेइंग मशीनों से जोड़ा जा रहा है ताकि घटतौली की गुंजाइश न रहे। अब तक कोटेदारों की कमाई घटतौली से ही हो रही थी। इसी कारण पूर्ति विभाग में राशन वितरण में हेराफेरी और कालाबाजारी के साथ सबसे ज्यादा शिकायतें घटतौली की हैं। अब शासन के ई-वेइंग मशीनें लगाने के एलान के बाद कोटेदारों में खलबली का माहौल है। हाल ही में दो कोटेदारों ने अपनी दुकानें सरेंडर कर दी हैं। इन्होंने इसके पीछे निजी कारण बताए हैं लेकिन असल वजह ई-वेइंग व्यवस्था लागू होना बताया जा रहा है।

कोटेदारों का दावा है कि अगले कुछ दिनों में कई और ऐसी दुकानें सरेंडर हो सकती हैं जिनसे कम संख्या में राशनकार्ड संबद्ध हैं। कोटेदारों का कहना है कि नई व्यवस्था के तकनीकी पहलू उन पर भारी पड़ेंगे और वितरण में समय भी ज्यादा लगेगा। ईमानदारी से राशन वितरण करने से उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा लिहाजा वे यह दबाव झेलने की स्थिति में नहीं हैं। दुकान सरेंडर करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। फिलहाल जिले को 1790 ई-वेइंग मशीनें मिल चुकी हैं। इसके बाद प्राइवेट एजेंसी तहसीलवार कोटेदारों को मशीन चलाने की ट्रेनिंग दे रही है। ई-वेइंग मशीन से पूरा राशन तौले जाने के बाद ही पर्ची निकलेगी। इसके अलावा गेहूं और चावल यूनिटों के हिसाब से अलग-अलग तौलना होगा। इससे घटतौली पर लगाम लगेगी।

ई-वेइंग मशीनों से राशन वितरण इसी महीने शुरू कराया जाएगा। फिलहाल ट्रेनिंग दी जा रही है। दो कोटेदारों ने निजी कारण बताकर इस्तीफे दिए हैं। ई-वेइंग मशीनों से इसका लेनादेना नहीं है। - नीरज सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी

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