पूर्णिमा को बदल जाती है सोमेश्वर महादेव मंदिर में त्रिशूल की दिशा, चंद्र देव ने की थी स्थापना
कई बार लोगों ने देखा है ये अद्भुद चमत्कार

राजीव कुमार/ नैनी/ प्रयागराज, अमृत विचार। प्रयागराज स्थित नैनी के अरैल क्षेत्र के सोमेश्वर महादेव मंदिर की विशेषताओं का जिक्र शिव महापुराण में भी मिलता है। खास बात यह है कि सोमेश्वर महादेव मंदिर में लगा 'त्रिशूल' बहुत चमत्कारिक है। बताते है कि हर 15 दिन पर त्रिशूल की दिशा बदल जाती है। यदि अमावस्या को इसकी दिशा उत्तर से दक्षिण है तो पूर्णिमा को पूरब से पश्चिम हो जाती है। मान्यता है कि मृत्युलोक के निर्माण होने से पहले भगवान चंद्रदेव ने इस मंदिर की स्थापना की थी। अक्षयवट क्षेत्र के अग्निकोण अर्थात् पूर्व और दक्षिण के कोने पर जहां गंगा जमुना की धारा मिलती है उसके दक्षिणी तट पर प्रभाष नाम के क्षेत्र में विख्यात सोम तीर्थ है। मंदिर परिसर में एक अष्टकोणीय प्रस्तर स्तम्भ 'धर्मदंड' में 15 पंक्तियों का एक लेख संस्कृत में लिखा है, जिसमें संवत् 1674 का उल्लेख है। यह लेख जयपुर के राजा मानसिंह ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराने के समय लिखा था।
इस मंदिर के पीछे एक कथा यह भी है कि राजा दक्ष की 27 पुत्रियां थी। राजा दक्ष ने अपनी सभी पुत्रियों की शादी चंद्रदेव के साथ की थी क्योंकि चंद्रदेव भी देवताओं में सबसे सुंदर माने जाते थे। चंद्रदेव केवल रोहिणी को पसंद करते थे। शेष पत्नियों से कोई लगाव नहीं रखते थे। उन्हें अपनी सुंदरता पर घमंड था। इस कारण राजा दक्ष ने चंद्रदेव को श्राप दिया कि जिस प्रकार से तुम्हें अपनी सुंदरता पर घमंड है उसी प्रकार तुम्हें कुष्ठ रोग हो और तुम्हें अपने आप से घृणा हो। तब से चंद्रदेव कुष्ठ रोग से पीड़ित हो गए और श्राप का प्रायश्चित करने के लिए सभी देवताओं के चक्कर काटने लगे। तब ब्रह्मा जी ने उनसे मृत्युलोक जाकर शिवलिंग की स्थापना करने को कहा। चंद्रदेव ने जब शिवलिंग की स्थापना की तो उन्हें कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली। यह भी कहा जाता है कि भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर चंद्रमा को रोग से मुक्त कर दिया। और उन्हें अपने शीष पर बैठने की अनुमति प्रदान की।
मुगल शासक औरंगजेब नहीं घुस पाया मंदिर में
सोमेश्वर महादेव मंदिर में मुगल शासक औरंगजेब ने हमला किया था। हमले के दौरान वह मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर सका। उसने मंदिर के बाहर रखी मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसके अवशेष आज भी मंदिर में मौजूद है।
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