कुतुबखाना पुल: हां में हां करते-करते मुश्किल में फंसी अफसरों की जान

बरेली, अमृत विचार। दुकानदारों के लाख दुखड़ा रोने के बावजूद कुतुबखाना पुल के निर्माण की रफ्तार में पिछले एक साल के दौरान कोई फर्क नहीं आया लेकिन अब लोकसभा चुनाव का फंदा ऐसा फंसा है कि अफसरों की सांसें अटकने लगी हैं।
इससे पहले स्मार्ट सिटी और सेतु निगम दोनों के अफसर ठेकेदार की हां में हां में मिलाते रहे और पुल का निर्माण पूरा करने की समय सीमा जून से अक्टूबर और अक्टूबर से दिसंबर तक बढ़ती गई। लेकिन अब तय हो गया है कि 15 फरवरी तक पुल उद्घाटन करने की स्थिति में न पहुंचा तो ठेकेदार तगड़ा जुर्माना झेलेगा और अफसर कठोर कार्रवाई।
लोक निर्माण विभाग के मंत्री जितिन प्रसाद के कुतुबखाना पुल के निरीक्षण और चेतावनी के बाद अफसर तनाव में हैं। यही वजह है कि वे अब पुल के निर्माण कार्य की सुबह-शाम दोनों वक्त नियमित मॉनिटरिंग करा रहे है।
दरअसल, स्मार्ट सिटी के तहत 111 करोड़ की लागत से सितंबर 2022 में जब 1280 मीटर लंबे कुतुबखाना पुल का निर्माण शुरू हुआ था तो उसका विरोध कर रहे दुकानदारों को छह महीने के अंदर काम पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। इस हिसाब से जून 2023 तक काम पूरा होना था लेकिन हुआ 25 फीसदी भी नहीं। इसके बाद ठेकेदार ने अक्टूबर और 31 दिसंबर का वादा किया, अफसरों ने भी इस वादे पर अपनी मुहर लगाई लेकिन पुल का निर्माण चलता रहा और लोकसभा चुनाव सिर पर आ गया।
बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम में शामिल होने आए विभागीय मंत्री जितिन प्रसाद ने सांसद संतोष गंगवार के साथ पुल का निरीक्षण करने के बाद अफसरों को साफ चेतावनी दी कि पुल बनने से पहले आचार संहिता लगी तो वह अफसरों और ठेकेदार दोनों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। इस पर ठेकेदार ने 30 जनवरी तक पुल का निर्माण पूरा करने और 15 फरवरी तक सड़क बनाने के साथ बाकी काम पूरे करने का वादा किया है।अफसर इसके बाद पुल 15 फरवरी तक पूरा होने की उम्मीद तो जता रहे हैं लेकिन फिर भी उनका तनाव बढ़ता जा रहा है।
हर मौके पर साबित की ठेकेदार से हमदर्दी
अफसर ही अब ठेकेदार का रक्षा कवच बने हुए थे। मजदूर समेत दो लोगों की मौत के मामले में उसकी लापरवाही सामने आई लेकिन अफसरों ने उसकी पैरवी में कोई कमी नहीं छोड़ी। सेतु निगम के तत्कालीन महाप्रबंधक ने तो धीमे काम पर कई बार नाराजगी जताई लेकिन स्थानीय स्तर पर उस पर कोई सख्ती नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक स्मार्ट सिटी कंपनी के एसीईओ को भी उसके खिलाफ कई बार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया लेकिन उन्होंने उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया।
ठेकेदार झेलेगा सिर्फ 22 लाख जुर्माना, अफसरों का क्या होगा
अगर दावे के मुताबिक ठेकेदार 30 जनवरी तक पुल का निर्माण पूरा न कर पाया तो उस पर 22 लाख का जुर्माना डाला जाएगा। इससे पहले दो बार में 55 लाख का जुर्माना उस पर डाला जा चुका है। खुद अफसरों का मानना है कि इस जुर्माने से ठेकेदार पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन अगर 15 फरवरी तक पुल पर आवाजाही शुरू नहीं हुई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। सेतु निगम के डीपीएम अरुण कुमार का कहना है मॉनिटरिंग करने वाले अभियंताओं से नियमित रूप से रिपोर्ट मांगी जा रही है।
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