मेट्रो से उतरिए और विमान पर चढ़िए… Kanpur Airport के नए टर्मिनल तक मेट्रो सेवा को ले जाने पर शुरू हुआ मंथन

कानपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल तक मेट्रो सेवा को ले जाने पर शुरू हुआ मंथन।

मेट्रो से उतरिए और विमान पर चढ़िए… Kanpur Airport के नए टर्मिनल तक मेट्रो सेवा को ले जाने पर शुरू हुआ मंथन

कानपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल तक मेट्रो सेवा को ले जाने पर मंथन शुरू हुआ। उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्ताव पर विमानपत्तन प्राधिकरण ने भी सहमति दी।

कानपुर, अमृत विचार। अभी आईआईटी से मोतीझील तक दौड़ रही मेट्रो पूरी उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव से पहले सेंट्रल स्टेशन तक का सफर तय करने लगेगी। इस बीच जनता की मांग के अनुरूप मेट्रो को एयरपोर्ट के नए टर्मिनल तक ले जाने की योजना पर मंथन शुरू हो गया है।

इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किए जाने को लेकर उप्र मेट्रो रेल कारपोरेशन के साथ ही भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने मौखिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। 

मेट्रो के प्रथम कारिडोर आईआईटी-नौबस्ता पर काम तेजी से चल रहा है। अगले साल दीपावली तक इस पूरे रूट पर मेट्रो सेवा शुरू करने की डेडलाइन तय की जा चुकी है। इसी के साथ मेट्रो की एयरपोर्ट के नए टर्मिनल तक कनेक्टिविटी दिए जाने को लेकर विचार विमर्श शुरू हो गया है।  

उच्चस्तरीय बैठक में आया प्रस्ताव

हाल ही में कानपुर में गतिशील शहरी यातायात सेवाओं को एकीकृत करने और मेट्रो की राईडरशिप में भविष्य की वृद्धि को ध्यान में रखते हुए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में यूपीएमआरसी के अधिकारियों की बैठक हुई थी। इस दौरान कानपुर में मेट्रो के विस्तार और नई योजनाओं पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने मेट्रो को कानपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल तक चलाना प्रस्तावित किया।

टाटमिल से चकेरी तक बनेंगे छह स्टेशन 

मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक एयरपोर्ट के नए टर्मिनल तक मेट्रो के विस्तारीकरण में टाट मिल से चकेरी तक छह स्टेशन बनाने पड़ेंगे। यह पूरा रूट जीटी रोड पर एलिवेटेड होने के कारण जल्दी तैयार भी हो जाएगा। इस दौरान सब-वे, स्काई वॉक-वे के साथ ही टिकट कियोस्क सहित अन्य सुविधाएं यात्रियों को देनी होंगी। 

पहले कॉरिडोर में ही टाटमिल से चकेरी तक मेट्रो को चलाया जा सकता है। इसके लिए हमें यहां आधा दर्जन मेट्रो स्टेशन बनाने पड़ सकते हैं। यह ज्यादा मुश्किल नहीं हैं। जब तक सरकार की हरी झंडी नहीं मिलती तब तक कुछ कहना जल्दबाजी है। क्योंकि, नए रूट पर मेट्रो दौड़ाना एक लंबी प्रक्रिया है। मांग तो बर्रा और नौबस्ता को भी जोड़ने की है, लेकिन सरकार व उच्च अधिकारियों की सहमति के बाद ही कुछ  कहा जा सकता है।- पंचानन मिश्रा, महाप्रबंधक (जनसंपर्क), यूपीएमआरसी।

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