बड़ी उपलब्धि

बड़ी उपलब्धि

असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद को लेकर गुरुवार को समाधान समझौता हुआ। वास्तव में यह एक बड़ी उपलब्धि है। कहा जा सकता है कि समझौते से दोनों राज्यों में समृद्धि और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। समझौता शांतिपूर्ण और संघर्ष-मुक्त पूर्वोत्तर की स्थापना के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुए इस समझौते पर असम और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। गौरतलब है पूर्वोत्तर क्षेत्र अपनी रणनीतिक अहमियत के अलावा सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता के लिए भी पहचाना जाता है।

पूर्वोत्तर में आठ राज्य हैं- अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, सिक्किम, मिज़ोरम, मेघालय और नागालैंड। यह क्षेत्र म्यांमार, चीन, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों के साथ 5,812 किलोमीटर की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को साझा करता है। इन राज्यों में लंबे समय से सीमा विवाद बना हुआ है। इलाके में अलग राज्यों के गठन के समय सीमा का सही निर्धारण नहीं होना ही विवाद की जड़ है। प्रशासनिक सहूलियत के लिए असम से काट कर नए राज्यों के गठन का सिलसिला वर्ष 1962 के बाद शुरू हुआ था।

वर्ष 1987 में बनाए गए अरुणाचल प्रदेश राज्य का दावा रहा है कि पारंपरिक रूप से इसके निवासियों की कुछ भूमि असम को दे दी गई। असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सीमा पर सबसे पहले वर्ष 1992 में हिंसक झड़प हुई थी। उसी समय से दोनों पक्ष एक-दूसरे पर अवैध अतिक्रमण और हिंसा भड़काने के आरोप लगाते रहते हैं। 

असम और मेघालय सीमा पर भी अक्सर हिंसक झड़पों की खबरें आती रहती हैं। असम और अरूणाचल के बीच 804 किलोमीटर लंबी सीमा है। सीमा पर बसे 123 गांवों को लेकर विवाद था। इसमें से 36 गांवों का समझौता पहले ही हो चुका है। अब 87 गांवों की सीमा के विवाद पर समझौता हुआ। मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के बीच जारी सीमा विवाद के कारण भी अक्सर हिंसा की घटनाएं होती रहती हैं। अब केंद्र सरकार की पहल पर उनको सुलझाने की दिशा में पहली बार ठोस प्रयास शुरू हुए हैं।

इसी के चलते असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि मिजोरम और नागालैंड के साथ भी सीमा विवादों का समाधान किया जाएगा। पिछले वर्ष असम ने मेघालय के साथ भी सीमा विवाद के समाधान से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उम्मीद की जा सकती है कि क्षेत्र में विवाद समाप्ति की दिशा में किए जा रहे केंद्र व राज्यों के साझा प्रयासों से पूर्वोत्तर में विकास को लेकर लंबे समय से चली आ रही चुनौतियां भी कम होंगी।

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