यूपीसीडा भर्ती घोटाला: जांच पर जांच, लेकिन नहीं हुआ पूरा पर्दाफाश

कानपुर। उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण में 2008 व 2009 में हुई बैकलॉग के रिक्त पदों पर भर्ती की पूरी की पूरी प्रक्रिया ही फर्जी थी। न तो नियुक्ति कमेटी मानक के अनुरूप थी और न ही अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र सही थे, लेकिन भर्तियां मनमाने तरीके से हुईं और लोग आज भी वेतन पा …
कानपुर। उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण में 2008 व 2009 में हुई बैकलॉग के रिक्त पदों पर भर्ती की पूरी की पूरी प्रक्रिया ही फर्जी थी। न तो नियुक्ति कमेटी मानक के अनुरूप थी और न ही अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र सही थे, लेकिन भर्तियां मनमाने तरीके से हुईं और लोग आज भी वेतन पा रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया पूरी होते ही शिकायत हुई थी।
तब बसपा सरकार थी। 2012 में सपा सरकार बनी तो अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने। उन्होंने जांच कराई। जांच पूरी भी हो गई पर कार्रवाई नहीं हुई। 2017 में भाजपा सरकार बनी फिर भी पांच साल रिपोर्ट दबी रही। मुख्यमंत्री पद पर योगी आदित्यनाथ दोबारा आसीन हो गए फिर भी जांच ही चल रही है। पहले प्रशासनिक अफसर जांच करते थे अब सतर्कता अधिष्ठापन विभाग जांच कर रहा है।
तमाम शिकायतों के बाद इस भर्ती की विस्तृत जांच के लिए सपा सरकार आते ही सबसे पहले तत्कालीन मंडलायुक्त मोहम्मद इफ्तखारुद्दीन को नियुक्त किया गया। उन्होंने जांच शुरू की पर अभिलेख नहीं मिले। विवश होकर उन्होंने जांच वापस कर दी थी। इसके बाद हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के आयुक्त एवं निदेशक रहे रणवीर प्रसाद को जांच मिली।
उन्होंने जांच पूरी की। उन्होंने अपनी रिपोर्ट मार्च 2017 में दी थी। यह जांच रिपोर्ट अमृत विचार के पास है। रणवीर प्रसाद ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट कहा है कि उन्होंने खुद का चयन उच्च पद पर कराने के लिए दबाव में काम किया और साक्षात्कार में उन्हें अधिक नंबर दिए जिनका प्रबंधन चयन करना चाहता था। अपनों का चयन करने के लिए प्रबंधन ने विज्ञापन निकालने में भी खेल किया।
आयुक्त की जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
चयन समिति में उन्हें भी शामिल कर लिया गया जो स्वयं किसी न किसी पद के लिए अभ्यर्थी थे। समिति में विषय विशेषज्ञ के रूप में ऐसे कर्मचारी व अधिकारी रखे गए जो संबंधित विषय के विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त होने के योग्य नहीं थे। चयन समिति में डीएम द्वारा नामित प्रतिनिधि होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यही नहीं बिना शासन की अनुमति के पदों की शैक्षिक योग्यता में मनचाहा परिवर्तन कर दिया गया।
जांच अधिकारी को पूरे अभिलेख नहीं दिए
रणवीर प्रसाद ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि वह जांच हेतु जरूरी अभिलेखों की मांग निरंतर करते रहे पर उन्हें आवश्यक मूल अभिलेख नहीं दिए गए। यही नहीं तमाम अभिलेख कांट- छांटकर उपलब्ध कराए गए। ऐसे में यह प्रतीत होता है कि भर्ती में और भी अनियिमतताएं हुईं हैं जिन्हें छिपाया जा रहा है। इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों ने जांच में परोक्ष रूप से रुकावट डाली है।