बदायूं: उसहैत क्षेत्र में गंगा के दलदल में फंसी दर्जनभर गाय, दो की मौत

बदायूं: उसहैत क्षेत्र में गंगा के दलदल में फंसी दर्जनभर गाय, दो की मौत

अमृत विचार, बदायूं। उसहैत क्षेत्र के गंगा किनारे के गांव लीला नगला के पास बीती शाम जंगल में विचरण करने वाली गायों का एक झुंड गंगा की दलदल में फंस गया। बताया जाता है कई घंटों से फंसे गायों के इस झुंड पर कुछ ग्रामीणों की नजर पड़ गई। गांव वालों ने थाने समेत विभिन्न …

अमृत विचार, बदायूं। उसहैत क्षेत्र के गंगा किनारे के गांव लीला नगला के पास बीती शाम जंगल में विचरण करने वाली गायों का एक झुंड गंगा की दलदल में फंस गया। बताया जाता है कई घंटों से फंसे गायों के इस झुंड पर कुछ ग्रामीणों की नजर पड़ गई। गांव वालों ने थाने समेत विभिन्न विभागों को इसकी सूचना दी।

शाम को ही लगभग चार घंटे चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में फंसी तमाम गायों को बचा लिया गया लेकिन दो की मौके पर ही मौत हो गई। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक गाय दलदल से निकलकर पशु चिकित्सा विभाग के कंपाउंडर पर दौड़ पड़ी और उसे सींगों से उठाकर पटकने के बाद उसे मारने लगी।

उस दौरान अगर, ग्रामीण बचाने नहीं पहुंचते तो गाय उसे मार ही डालती। गांव वालों ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन में कड़ी मशक्कत की और पुलिस और प्रशासन की भारी मदद की। उसहैत में गंगा की कटरी में सैकड़ों गायें झुंडों के रूप में घूमती हैं। इन्हें गांव वाले जंगली गायें कहते हैं। इनके झुंड कभी-कभी गांव वालों पर भी हमलावर हो जाते हैं।

गांव वालों को अपने खेतों की रखवाली को इन्हें समूह में ही खदेड़ना पड़ता है। एक-दो लोगों को तो यह पास तक नहीं फटकने देतीं। गंगा की कटरी छुट्टा गोवंश को बेहद पसंदीदा जगह है। आसपास मीलों तक खुला मैदान और ऊंची-ऊंची घास के अलावा गंगा का किनारा होने के कारण प्यास बुझाने का साधन भी भरपूर है।

यहां गांवंशों के झुंड के झुंड रहते हैं। बताया जाता है कि सोमवार की रात किसी समय भटकते हुए गायों का एक झुंड गंगा में उतर गया। जहां बालू के स्थान पर मिट्टी अधिक होने के कारण दलदल हो गया है। एक-एक कर झुंड की करीब दर्जनभर गायें इस दलदल में फंस गईं।

गांव के रकबा से जगह दूर होने के कारण उधर कम ही लोग जाते हैं। मंगलवार की शाम को उधर से निकले कुछ लोगों ने दलदल में रंभाते हुए देखा तो कई गायें यहां फंसी पड़ी थी। धीरे-धीरे यह खबर पूरे इलाके में फैल गई। लीला नगला गांव पास में ही है। गांव के तमाम लोग गंगा किनारे उस जगह पहुंच गए, जहां गायें दलदल में फंसी रंभा रही थीं।
गांव वालों ने इकट्ठे किए पुलिस समेत कई विभाग के कर्मचारी
गांव वालों ने पहले तो खुद ही प्रयास किए लेकिन गायों के हमला करने के खौफ से उन्होंने पुलिस, विकास विभाग और राजस्व विभाग के अलावा पशु चिकित्सा विभाग के लोगों को भी बुला लिया। किसी तरह रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। बड़े-बड़े रस्सों का इसमें इस्तेमाल किया गया। भीड़भाड़ के बीच करीब चार घंटे चले ऑपरेशन में गोवंश को बचाने का काम किया गया। बावजूद इसके दो गायों की मौत हो गई। बाद में इन दोनो मृत गायों को वहीं गड्ढा खोदकर दफना दिया गया।
गायों को रेस्क्यू करके बचा लिया गया है। जो दो गायें दलदल में फंसी रहने के कारण मर गईं। उन्हें भी दलदल से निकाल कर वहीं गड्ढा खुदवाकर दफना दिया गया है। बाकी जो गायें इलाज लायक हैं, उनको इलाज दिया जा रहा है।
—एके जादौन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बदायूं

ये भी पढ़ें-

लखीमपुर-खीरी: कोहरा पड़ा भारी, हवा में दस मिनट तक उड़ता रहा रक्षा मंत्री का उड़नखटोला