दिल्ली: टिकट नहीं मिलने से गुस्साए कार्यकर्ताओं को संभाल सकते हैं शाह, चुनावी रैलियों के साथ उत्साह भरने का भी होगा काम

दिल्ली: टिकट नहीं मिलने से गुस्साए कार्यकर्ताओं को संभाल सकते हैं शाह, चुनावी रैलियों के साथ उत्साह भरने का भी होगा काम

नई दिल्ली। यूपी के विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने रैलियों पर 22 जनवरी तक रोक लगा दी है। उम्मीद है कि 22 जनवरी के बाद चुनाव आयोग शर्तों के साथ रैलियां करने पर कुछ छूट दे सकता है। जिसको लेकर भाजपा ने अपनी चुनावी रैलियों का कार्याक्रम तय करना शुरू कर दिया है। …

नई दिल्ली। यूपी के विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने रैलियों पर 22 जनवरी तक रोक लगा दी है। उम्मीद है कि 22 जनवरी के बाद चुनाव आयोग शर्तों के साथ रैलियां करने पर कुछ छूट दे सकता है। जिसको लेकर भाजपा ने अपनी चुनावी रैलियों का कार्याक्रम तय करना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अन्य नेताओं ने बैठक कर योजना तैयार की है। मगर बताया जा रहा है कि इस बार चुनावी रैलियों में अमित शाह का कार्यक्रम कुछ अलग हो सकता है। अमित शाह सिर्फ जनता को ही अपनी ओर नहीं खीचेंगे बल्कि टिकट नहीं मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं में भी जोश भरेंगें। जिससे संगठन के तार भी मजबूत हों।

दरअसल, अमित शाह रैलियों में जाकर जनता के साथ ही साथ टिकट नहीं मिलने से नाराज पार्टी के कार्यकर्ता और उनके समर्थकों को पार्टी के लिए सक्रिय रूप से खड़ा करेंगे। वह उनमें काम करने के लिए जोश भी भरेंगे। चर्चा है कि जमीनी स्तर पर तैयारी के लिहाज से ही नवंबर में शाह समेत राजनाथ और नड्डा ने बूथ अध्यक्षों को संबोधित किया था। यह कवायद केवल जीत का मंत्र देने के लिए नहीं थी बल्कि उनके मनोबल को बढ़ाने के लिए थी।

बीते 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 2017 के विधानसभा और फिर 2019 में लोकसभा चुनावों में शाह की लगातार मौजूदगी ने यूपी के कार्यकर्ताओं को उत्साहित किया। तीनों चुनावों में विपक्षी गठबंधन के बावजूद भाजपा की बड़ी जीत का कारण भी यही था और इसी कारण प्रधानमंत्री मोदी का संदेश घर-घर पहुंचाया जा सका था। हालांकि चर्चा यह भी है कि इस बार भाजपा के टिकट वितरण से उनकी गणित गड़बड़ा सकती है। फिलहाल अभी 20 से 25 प्रतिशत टिकट कटने की भी चर्चा जोरों पर है।