अमेठी: निजी विद्यालय के संचालक अभिभावकों की जेब पर डाल रहें हैं डाका, जानें कैसे?

अमेठी। विकास क्षे बाजार शुक्ल क्षेत्र मे निजी स्कूलों के संचालक अविभावकों की जेबे ढीली करने मे लगे हुए है। विद्यालयों में अध्यनरत छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि क्षेत्र में खुले मानक विहीन विद्यालयों में कई विद्यालय तो ऐसे हैं जिनके परिसर में आप को बकायदा खेती होती भी दिखाई देगी। चंद कमरा …
अमेठी। विकास क्षे बाजार शुक्ल क्षेत्र मे निजी स्कूलों के संचालक अविभावकों की जेबे ढीली करने मे लगे हुए है। विद्यालयों में अध्यनरत छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि क्षेत्र में खुले मानक विहीन विद्यालयों में कई विद्यालय तो ऐसे हैं जिनके परिसर में आप को बकायदा खेती होती भी दिखाई देगी। चंद कमरा बनवा कर मान्यता लेकर विद्यालय चलाने वाले इन निजी विद्यालय वाले जहां अयोग्य शिक्षक के सहारे विद्यालय चलाते हैं और मनमानी मोटी फीस वसूलते हैं वहीं इन दिनों विद्यालय खुलने के बाद कॉपी, किताब, ड्रेस, जूता आदि के नाम पर भी छात्रों और उनके परिजनों को लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
छात्रों के परिजनों की मानें तो 25 से 30 पेज की किताब 150 से लेकर 300 तक बेचते हैं जबकि इतनी महंगी तो रामायण नहीं बिकती जो कि काफी मोटी होती है, और जिसमें काफी कागज और स्याही खर्च होती है जानकार लोगों की माने तो इन विद्यालय वालों का कॉपी किताब में 70 से 80 परसेंट तक कमीशन फिक्स होता है छात्रों के परिजनों के अनुसार कक्षा एक में 3000 के आसपास की किताब की कीमत वसूलते हैं। कक्षा 3 ,4 के छात्रों की कॉपी किताब का मूल्य 4000 के बीच में वसूलते हैं।
जहां एक तरफ कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के चलते ग्रामीण क्षेत्र होने के चलते जनता वैसे भी परेशान है वही किसी तरह पेट काटकर अपने बच्चों को शिक्षा देने के नाम पर निजी विद्यालय वाले डाका डालने से भी बाज नहीं आ रहे। आज हर एक व्यक्ति चाहता है कि उसकी संतान अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अच्छा जीवन यापन करें जिसके लिए माता-पिता चाहे एक टाइम भूखे सो जाएं लेकिन अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न मिलने के चलते क्षेत्र के ज्यादातर लोग निजी विद्यालयों का सहारा लेते हैं और यह निजी विद्यालय संचालक छात्रों के माता-पिता को लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते।
जहां मनमानी फीस वसूलते हैं वहीं कई तरह के अतिरिक्त चार्ज भी वसूलते हैं सबसे बड़ी बात यह है कि 24000 श्लोकों वाली रामायण से भी महंगी 30 से 40 पेज की किताब कक्षा एक से ही शुरु करते हैं। जिस पर सूत्रों की माने तो 70 से 80 प्रतिशत कमीशन निजी विद्यालय संचालक का होता है। इस मामले मे जिले के बेसिक शिक्षाअधिकारी तथा जिला विद्यालय निरीक्षक से जानकारी ली गई तो उनका कहना था उन्हें इस तरह की जानकारी नहीं है, यदि शिकायत मिली तो संबंधित विद्यालयों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।