सर्दी आई बर्फ ओढ़ के हमने पहना स्वेटर…

सर्दी आई बर्फ ओढ़ के हमने पहना स्वेटर। स्वेटर में कांपे हड्डियाँ लाओ लाओ हीटर।। हीटर का भी मीटर डाउन, जलाया उसके नीचे अलाव। तब जाकर हीटर बाबू ठीक से देने लगे ताव।। ताव पाकर मिली राहत कुछ गर्म खाने का किया मन। बोल पड़े तपाक से मम्मी पकोड़ी बनने दो गर्मा गरम।। गर्मागरम पकोड़ी …
सर्दी आई बर्फ ओढ़ के हमने पहना स्वेटर।
स्वेटर में कांपे हड्डियाँ लाओ लाओ हीटर।।
हीटर का भी मीटर डाउन, जलाया उसके नीचे अलाव।
तब जाकर हीटर बाबू ठीक से देने लगे ताव।।
ताव पाकर मिली राहत कुछ गर्म खाने का किया मन।
बोल पड़े तपाक से मम्मी पकोड़ी बनने दो गर्मा गरम।।
गर्मागरम पकोड़ी मम्मी बोली जी बिलकुल खाओ।
पर तुमने जो दिन में खाया वो बर्तन धोकर आओ।
बर्तन धोने की बात सुन मानो सर्दी हुई और सर्द।
पकोड़ी के लिए रख दी गई बड़ी भयानक शर्त।।
रख दी शर्त भयानक पर पकोड़ी मन ललचाये।
बर्तन मम्मी रोज धोती, चलो आज अपन धोकर आयें।
धोने को बर्तन कसी कमर, लेकर प्रभु का नाम।
जैसे ही पानी ने छुआ हाथों को, मुंह में आये प्राण।।
मुंह में आये प्राण, बदन में छूटी कंप कँपी।
बर्तन धोते धोते हनुमान चालीसा है जपी।।
हनुमान चालीसा जपते जपते खुली दिमाग की खिड़की।
किया भगवान को खूब धन्यवाद्, जो मुझे नहीं बनाया लड़की।।
नहीं बनाया लड़की, कितना मुश्किल सर्दी में बर्तन धोना।
मम्मी सर्दी में सुबह शाम धोती और हम ना छोड़ते बिछौना।।
हम ना छोड़ते बिछौना, ऊपर से हुकुम चलाते।
खाने या बर्तन में दिखे खामी, तो गुस्सा और दिखाते।।
गुस्सा और दिखाते बिना देखे उनका दर्द।
सोचा खुद के बर्तन खुद धोकर बनेंगे हमदर्द।।
बनेंगे हमदर्द आखिर वो भी है इंसान।
माँ हो या फ्यूचर में बीवी करेंगे यह नेक काम।।
करेंगे यह नेक काम आखिरकार हमको अक्ल आई।
सभी मर्द यह समझे, ऐसा करने में तुम्हारी भी भलाई।।
- लोकेश इन्दौरा
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