बरेली: दूसरी खुराक के लिए डब्ल्यूएचओ ने जारी की गाइडलाइन

बरेली: दूसरी खुराक के लिए डब्ल्यूएचओ ने जारी की गाइडलाइन

अमृत विचार,बरेली। कोविड-19 वायरस का प्रभाव समाप्त करने के लिए वैक्सीन का निर्माण होने के बाद टीकारण की शुरूआत भी हो चुकी है। देश में इन दिनों चल रहे टीकाकरण अभियान के बीच वैक्सीन विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, चिकित्सकों का कहना था कि कोरोना की वैक्सीन की पहली खुराक के बाद 6 से 12 हफ्ते का अंतराल …

अमृत विचार,बरेली। कोविड-19 वायरस का प्रभाव समाप्त करने के लिए वैक्सीन का निर्माण होने के बाद टीकारण की शुरूआत भी हो चुकी है। देश में इन दिनों चल रहे टीकाकरण अभियान के बीच वैक्सीन विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, चिकित्सकों का कहना था कि कोरोना की वैक्सीन की पहली खुराक के बाद 6 से 12 हफ्ते का अंतराल जरूर रखना चाहिए। इस पर गुरूवार को डब्ल्यूएचओ ने भी गाइडलाइन जारी करते हुए कोरोना की दूसरी खुराक में अंतराल रखने का सुझाव दिया है। अमृत विचार ने इसी खबर को 10 फरवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

देश में कोरोना टीकाकरण अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंट लाइन वर्करों के वैक्सीनेशन में अधिकांश तौर पर कोविशील्ड वैक्सीन ही लगाई जा रही है। ज्यादातर वैज्ञानिक और चिकित्सक इसे प्रभावी मान रहे हैं। हाल ही में मुंबई में आईएपी (बाल रोग विशेषज्ञ एकेडमिक) का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ।

बाल रोग विशेषज्ञ डा.अतुल अग्रवाल।

इसमें शामिल बाल रोग विशेषज्ञ व आईएपी के पदाधिकारी डा. अतुल अग्रवाल ने बताया कि कांफ्रेंस में बताया गया कि कोविशील्ड पर नए शोध से पता चलता है कि यदि दोनों खुराक के बीच 6-12 सप्ताह के बीच का अंतर हो तो यह बूस्टर प्रभावी हो सकती है। वर्तमान में भारत बायोटेक के कोवाक्सिन का उपयोग करता है, जिसके लिए तीन परीक्षण चल रहे हैं। अभी देश के सभी विशेषज्ञों ने कोविशील्ड पर शोध पर विचार करने के लिए सरकार से आह्वान किया है जिसकी समीक्षा की जा रही है।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित कोविशील्ड के एकल खुराक और दो-खुराक आहार के प्रभाव को मापने वाला एक अध्ययन हाल ही में हुआ, जिसे 1 फरवरी को द लांसेट के साथ प्री-प्रिंट्स पर पोस्ट किया गया था। यह अध्ययन अमेरिका में किया गया था। इसमें पाया गया कि एकल खुराक के साथ टीके की प्रभावकारिता 22% से 90 दिन तक निरंतर 76% थी। पहली खुराक के 12 सप्ताह बाद दूसरी खुराक लेने पर प्रभावकारिता दर 82% हो गई। जब पहले एक के बाद छह सप्ताह से कम में दूसरी खुराक दी गई थी तो प्रभावकारिता दर 54.9% थी। केंद्र सरकार को नए शोध पर विचार करना चाहिए और दूसरी खुराक का समय 8-12 सप्ताह के बीच बदलना चाहिए।

संक्रमित मरीजों को मिल चुकी है पहली खुराक?
डा.अतुल अग्रवाल ने बताया कि कांफ्रेंस में इस बात पर भी चर्चा हुई कि इस वैश्विक महामारी के दौरान जो देश में कोरोना संक्रमित होकर स्वस्थ्य हुए उन्हें एक प्रकार से टीका लग चुका है। इसके पीछे पक्ष था कि मरीज तभी स्वस्थ्य हो सका जब उसका शरीर एंटीबॉडी बन गया, जबकि वैक्सीन का टीका भी शरीर में एंटीबॉडी ही बनाता है। ऐसे में इस पर भी शोध करने की जरूरत है कि क्या संक्रमित से स्वस्थ्य हुए मरीजों को भी कोरोना के दो खुराक उचित है या फिर उसे एक ही टीका पर्याप्त है।

अलग-अलग वैक्सीन का परीक्षण हुआ असफल
डा.अतुल अग्रवाल ने बताया कि डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक अभी तक इंगलैंड, अमरीका आदि यूरोपीय देशों में यह भी परीक्षण चल रहा था कि कोरोना की दोनों खुराक अलग अलग कंपनियों की लगाई जाएं तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन अभी तक विश्व मे कोई भी डेटा उपलब्ध नही है जो दो तरह की वैक्सीन की मिक्सिंग की अनुमति देता हो हो, अतः दोनो खुराक एक ही कम्पनी के टीके की होनी चाहिए।