रामपुर : आजम की सजा पर तंजीन फातिमा बोलीं- नाइंसाफी की चरम सीमा, आखिरी सांस तक लड़ेंगे
जेल से जमानत पर छूटने के बाद पूर्व सांसद ने नाम नहीं लेते हुए मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह पर साधा निशाना, मीडिया से किया शिकवा सही प्रमाण पत्र को लिखा जा रहा फर्जी

शुक्रवार को अपने आवास पर पत्रकारों से रूबरू पूर्व सांसद डा. तजीन फातिमा।
रामपुर, अमृत विचार। पूर्व सांसद डा. तंजीन फातिमा ने कहा कि हम आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ते रहेंगे।डूंगरपुर मामले में आजम खां को 10 वर्ष की सजा नाइंसाफी की चरम सीमा है। मीडिया से शिकायत है कि दो जन्म प्रमाण पत्र मामले को फर्जी लिख रही है। कहा कि हमने चुनाव पर नजर डाली ही नहीं है अभी हम अपने मुकदमों में घिरे हुए हैं।
जिला कारागार रामपुर से जमानत पर छूटने के बाद पूर्व सांसद ने शुक्रवार की दोपहर टंकी नंबर पांच स्थित मोहल्ला घेर बाज खां में अपने आवास पर पत्रकारों से लोकसभा चुनाव के किसी भी सवाल पर कोई कमेंट करने से इंकार कर दिया। कहा कि दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में उन्हें मीडिया से भी शिकायत है। मीडिया मुकदमें के बाद भी लिख रही है फर्जी जन्म प्रमाण पत्र।
उन्होंने कहा कि यहां पर मैं इस बात को बिल्कुल साफ कर देना चाहती हूं कि इसमें कोई भी चीज फर्जी नहीं है। यह एक गलती में सुधार करवाने की कोशिश की गई बल्कि, सुधार करवाया गया है। जो प्रमाण पत्र यहां से बनवाया गया उसे निरस्त कराया गया। उसके बाद ही असली जो लखनऊ से इश्यू किया हुआ प्रमाण पत्र था वह लगाया गया। सारे प्रमाण पत्र मेरे पास हैं वक्त आने पर दिखा दूंगी।
कहा कि सभी मुकदमें फर्जी लिखवाए गए हैं। नाम नहीं लेते हुए मंडलायुक्त पर निशाना साधते हुए कहा कि एक अधिकारी के यहां हर आधे-आधे घंटे के बाद एफआईआर लिखी गई हैं। उस अधिकारी के कार्यालय में आधे-आधे घंटे एफआईआर लिखी गई। डूंगरपुर मामले में आजम खां को 10 वर्ष की सजा और 14 लाख रुपये जुर्माने किए जाने के जवाब में कहा कि कल गुरुवार को जो आजम साहब को सजा हुई है वह नाइंसाफी की चरम सीमा है। डूंगरपुर मामले में उनका कहीं नाम नहीं है। झूठे गवाहों के आधार पर उनको सजा दे दी गई।
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