बरेली: कामधेनु दीपावली में गोबर-गोमूत्र से बने दीपों से होगा पूजन

विश्वदीपक त्रिपाठी, बरेली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस बार की दीपावली को स्वदेशी अंदाज में मनाने की तैयारी कर रहा है। इस बार गोशालाओं के गोबर से दीप तैयार होंगे और गोमूत्र, गोबर से लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा बनाने के लिए स्वयंसेवक अभियान चलाएंगे। इसके लिए सहकार भारती और सेवाभारती के स्वयं इसके लिए प्रशिक्षण भी …
विश्वदीपक त्रिपाठी, बरेली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस बार की दीपावली को स्वदेशी अंदाज में मनाने की तैयारी कर रहा है। इस बार गोशालाओं के गोबर से दीप तैयार होंगे और गोमूत्र, गोबर से लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा बनाने के लिए स्वयंसेवक अभियान चलाएंगे। इसके लिए सहकार भारती और सेवाभारती के स्वयं इसके लिए प्रशिक्षण भी देंगे। जनपद के एक लाख से अधिक दीप बनाने का खाका तैयार किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए गो-संरक्षण व संवर्धन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दीपावली को इस बार कामधेनु दीपावली का रूप देने की तैयार की जा रही है। गाय के गोबर और गोमूत्र से दीये के साथ ही लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, स्वास्तिक आदि तैयार किया जाएगा। इसे नवंबर के पहले सप्ताह में शहरों और कस्बों में गोमूत्र व गोबर से तैयार दीये और मूर्तियों को बेचा जाएगा। एक दीये की कीमत कम से कम एक रुपये रखी गई है।
संघ से जुड़ी संस्था सहकार भारती की योजना है कि समूहों को प्रशिक्षित कर दीये बनवाए जाएंगे। स्वदेशी, स्वावलंबन, पर्यावरण, सामाजिक समरसता तथा गो संवर्धन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर्यावरण के अनुकूल गाय के गोबर से दीपक, हवन के लिये लकड़ी आदि प्रमुख रूप से तैयार करने जा रहा हैं। यहां दीपक, गणेश लक्ष्मी की मूर्ति, बंदनवार, स्वास्तिक, श्री आदि उत्पाद तैयार होने है। जबकि दूसरी तरफ कोरोना के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों को इससे स्वरोजगार भी मिलेगा।
संघ की मंशा है कि गोबर से बनें इन दीयों की रोशनी के बीच स्वावलंबन और स्वरोजगार को बढ़ाना है। लोग स्वदेशी अपनाएं और मोमबत्ती और चीन निर्मित झालरों का मोह छोड़ दें। इसके साथ गोबर के उत्पाद पर्यावरण के लिए अच्छा होगा। इसके लिए बड़े गोशालाओं में और गांव के समूह से दीये बनाए जाएंगे जिससे महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ा जा सके।