हल्द्वानी: पानी की टंकी में डूबा चार साल का बच्चा, उतराता मिला शव  

हल्द्वानी: पानी की टंकी में डूबा चार साल का बच्चा, उतराता मिला शव  

हल्द्वानी, अमृत विचार। मां और मौसी अन्य महिलाओं के साथ झोपड़ी में बैठकर बातें कर रही थीं और इधर चार साल का बच्चा खेलते-खेलते झोपड़ी के पीछे बनी पानी की टंकी में गिर गया। मौसी पानी लेने गई तो बच्चे का शव पानी में उतराते देखा। आनन-फानन में परिजन उसे लेकर बेस अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 

मूलरूप से धारपुर बदायूं उत्तर प्रदेश निवासी नरवीर पिछले करीब 8 साल से देवलाडांठ खेड़ा गौलापार में रहकर बंटाई पर खेती करता है, जबकि उसकी पत्नी रिंकी तीन बच्चों साक्षी (7 वर्ष), विकास (5 वर्ष) और आयुष (4 वर्ष) के साथ ससुराल में रहती थी। रिंकी के बाई पुष्पेंद्र ने बताया कि मुताबिक करीब 3 माह पहले रिंकी तीनों बच्चों के साथ पति के पास गौलापार आई थई।

शनिवार की सुबह रिंकी अपनी बहन सगुन व अन्य महिलाओं के साथ बैठी झोपड़ी में बातें कर रही थी। इसी बीच आयुष झोपड़ी से बाहर निकल गया। खेलते-खेलते आयुष झोपड़ी के पीछे बनी पानी की टंकी के पास पहुंच गया और उसमें गिर गया। अंदर बातें कर रहे परिवार वालों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

कुछ देर बाद आयुष की मौसी सगुन पानी लेने टंकी पर गई तो उसके होश फाख्ता हो गए। आयुष का शव टंकी में उतरा रहा था। शव देख वह चीख पड़ी और मौके पर लोग जमा हो गए। आनन-फानन में आयुष को लेकर परिजन बेस अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के बाद परिजन आयुष के शव को अंतिम संस्कार के लिए बदायूं ले गए। 

अधिकारियों के पैर पकड़े, नहीं टला पोस्टमार्टम
बेस अस्पताल में चिकित्सकों ने आयुष को मृत घोषित किया और पीआई पुलिस को भेज दी। पुलिस मौके पर पहुंची और जब परिजनों को यह पता लगा कि आयुष का पोस्टमार्टम होगा तो वह बेचैन हो गए। उन्होंने पुलिस से ऐसा न करने को कहा। पुलिस ने उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों के पास भेज दिया। परिवार के लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों के पैर तक पकड़ लिए, लेकिन पोस्टमार्टम नहीं टला। 

तीन महीने पहले भी आयुष बदायूं से हल्द्वानी आया था  
आयुष के मामा पुष्पेंद्र ने बताया कि उसकी पत्नी बच्चों के साथ ससुराल में ही रहती थी, जबकि नरवीर हल्द्वानी से पैसे जमाकर पत्नी के पास भेजता था। इससे पहले पत्नी यहां कभी रहने के लिए भी नहीं आई, लेकिन करीब 3 माह पहले वह घूमने के लिए बच्चों के साथ पति के पास आई थी। शिवरात्रि पर नरवीर पत्नी व बच्चों को लेकर मंदिर में दर्शन भी करने गया और अगले दिन आयुष की इस तरह मौत हो गई।  

डॉक्टर साहब ने भी नहीं सुनी बिलखती मां की गुहार
सुबह करीब साढ़े 9 बजे परिजन आयुष को लेकर बेस अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने आयुष के शरीर से पानी निकाला, ईसीजी आदि करने के बाद आयुष को मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद मां रिंकी ने चिकित्सकों से आयुष को रेफर करने की गुहार लगाई, लेकिन चिकित्सकों ने यह कहकर मना कर दिया कि आयुष की मौत हो चुकी है। करीब ढाई घंटे तक रिंकी बेटे को गोद में लिए वहीं बैठी बिलखती रही।