लखनऊ : गर्भावस्था में ओरल हाइजीन की कमी से हो सकता है भारी नुकसान

लखनऊ : गर्भावस्था में ओरल हाइजीन की कमी से हो सकता है भारी नुकसान

लखनऊ, अमृत विचार। ओरल हाइजीन यानी मुख की स्वच्छता का महत्व गर्भावस्था में महिलाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इसकी अनदेखी से कई प्रकार की बीमारियां और हार्मोनल डिसबैलेंस होने का खतरा रहता है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शनिवार से शुरू हुए दो दिवसीय यूपी डेंटल शो के पहले दिन देशभर से आए विशेषज्ञ ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए। 

इंडियन डेंटल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजीव चुग ने कहा कि जो नए शोध सामने आ रहे हैं उसे यह स्पष्ट होता है कि ओरल हाइजीन का गर्भवती महिला के जीवन में काफी असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था में महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। दांत या मुंह के अंदर गंदगी, किसी प्रकार का संक्रमण होने या किसी बीमारी के होने से हार्मोन में परिवर्तन हो सकता है और इसका पूरा असर गर्भ में पल रहे बच्चे और मां की सेहत पर पड़ सकता है। लिहाजा ओरल हाइजीन का गर्भावस्था में ध्यान रखना बेहद आवश्यक है डॉ. राजीव ने.तंबाकू की खपत कम न होने पर चिंता जताते हुए कहां कि इससे कैंसर समेत बहुत सी गंभीर बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि इससे देश की श्रम शक्ति का नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही एक भारी भरकम धन राशि लोगों के इलाज में खर्च हो रही है। कार्यक्रम के चीफ कोऑर्डिनेटर डॉ. आशीष खरे ने कहा कि इंडियन डेंटल एसोसिएशन इस संदर्भ में लगातार सरकार से पत्राचार कर रहा है कि तंबाकू का सेवन देश में बंद होना चाहिए। डॉ आशीष खरे ने कहा कि सरकार को केवल टैक्स के लिए तंबाकू की बिक्री नहीं करनी चाहिए इससे खास तौर पर युवा का नुकसान हो रहा है। 

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में इंडियन डेंटल एसोसिएशन के सचिव डॉ. अशोक ढोबले ने कहा कि संगठन लगातार ओरल हेल्थ पर स्टडी करता है और हाल की स्टडी से यह तथ्य सामने आए हैं कि देश में ओरल हेल्थ की स्थिति खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि इंडियन डेंटल एसोसिएशन ऐसी संभावनाओं की तलाश कर रहा है जिसमें मुख से ही ली गई जांच के जरिए कैंसर हृदय रोग लिवर या किडनी आदि में होने वाली गंभीर बीमारियों का पता चल सके। 

डॉ. अशोक ने कहा कि सलाइवा या दूसरी जांच से हम जल्द ही ऐसी सस्ती व सुलभ जांच उपलब्ध करा सकेंगे, जिससे मरीजों को जल्द से जल्द की बीमारी का पता चल सके। डॉ. अशोक ने कहा कि  वर्तमान में बच्चों में फास्ट फूड और सही से ब्रश नहीं करने की वजह से कई प्रकार की दांत की बीमारियां सामने आ रही है। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए अभिभावकों को यह सलाह दी कि वह दंत रोगों के प्रति लापरवाही ना करें। 

डॉ. अग्रवाल ने कहां कि डेंटल काउंसिल आफ इंडिया की जगह अब नेशनल डेंटल काउंसिल के गठन से बहुत सी दुश्वारियां दूर हो जाएंगी। उन्होंने एक अहम जानकारी देते हुए कहां कि जल्द ही अब डॉक्टरी की डिग्री लेने के बाद मरीज देखने से पहले एक टेस्ट अनिवार्य रूप से पास करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में 25000 स्नातक और 7000 पीजी की डिग्रियां दी जा रही हैं। 

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. प्रशांत भसीन ने रूट कैनाल ट्रीटमेंट की आधुनिक तकनीक के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अब जो बायो सेरेमिक तकनीक का इस्तेमाल रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) में किया जा रहा है, उससे न केवल दांतों का जीवन बढ़ा है, बल्कि संक्रमण की संभावना भी ना के बराबर रह जाती है। चेन्नई से आए डॉ. गोपी कृष्ण ने बताया कि आरसीटी के बाद दांतों को कैसे लंबे समय तक स्वस्थ रखा जाता है। डॉ. हर्षवर्धन आर्य और डॉक्टर दिनेश राय ने भी इस दौरान दांतों को स्वस्थ रखने के उपाय बताएं।

कार्यक्रम में संगठन के उपाध्यक्ष डॉ. प्रदीप अग्रवाल, डॉ. अमित शुक्ला, डॉ. अमिताभ, डॉ. हरविंदर सिंह, डॉ. रमेश भारती और डॉ. संजीव श्रीवास्तव ने भी जानकारियां दी।

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