कला सीखने की कोई उम्र नहीं होती है: अर्जुन मेघवाल

जयपुर। राजस्थान में ‘कला दर्शनम आर्ट कैंप’ के शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि कला सीखने की कोई उम्र नहीं होती और कोई भी व्यक्ति पूर्ण पारंगत नहीं होता है। लगातार सीखने से ही कलाकार की कला में दिन प्रतिदिन निखार आता है। सीखना एक सतत प्रक्रिया है। मेघवाल ने कल कहा, “कला एक ऐसी विधा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित होती है, तभी जीवित रह पाती है।
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यह हमारे देश का सौभाग्य है कि चाहे पेंटिंग हो, गायन हो, नृत्य हो या अन्य कोई कला, विरासत के रूप में आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इस कला संगम में जहां वरिष्ठ कलाकार अपनी सधी कला से सीधे अपने दर्शकों का दिल जीत रहे हैं, वहीं युवा उनसे प्रेरणा लेकर कला को आधुनिक रूप देकर और आकर्षक बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे जोश के साथ होश का बेहतरीन समन्वय हो रहा है।
युवाओं और अनुभव के साथ से कला में जो निखार आ रहा है वह न सिर्फ आर्ट को गहराई से समझने वाले, बल्कि युवाओं को भी भाने लगा है। बीकानेर के डॉ करणी सिंह स्टेडियम में शनिवार को ‘14वें राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव’ आयोजन किया गया है और रविवार को यहां ‘कला दर्शनम आर्ट कैंप’ का शुभारंभ भी किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर मेघवाल को बुलाया गया। यह कार्यक्रम दो मार्च तक चलेगा।
इस मौके पर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय में संयुक्त सचिव अमिता प्रसाद सरभाई और पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की निदेशक किरण सोनी गुप्ता भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर कूंची से जहां मेघवाल ने स्वास्तिक चिह्न बनाया, वहीं निदेशक किरण सोनी गुप्ता ने राजस्थानी साफा पहने पुरुष का चित्र उकेरा, जिसको काफी सराहा गया। '
कला दर्शनम' कैंप में 44 कलाकर अपनी आर्ट का प्रदर्शन कर रहे हैं, इनमें से कला के क्षेत्र में नाम कमा चुके 25 वरिष्ठ कलाकारों के साथ ही 19 युवा और विद्यार्थी भी भाग ले रहे हैं। इस कैंप की खूबी यह है कि हर कलाकार अपने उम्दा से उम्दा पेंटिंग्स बना रहे हैं। कलाकारों द्वारा बनाई जा रहीं पेंटिंग्स को आस-पास और सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आ रहे दर्शकों की खूब सराहना मिल रही हैं।
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