नववर्ष पर पढ़िए विमल कुमार की कविता- 'नए साल में तारे भी गहरी सांस लेंगे'
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नए साल में
क्या आसमान साफ रहेगा
पहले की तरह
धुंध और कोहरे से मुक्त हो जाएगा
वह
चांद भी मद्धम रहेगा
या फिर वह चमक जाएगा?
हवाएं पहले की तरह बहेंगी
किसी को बाहों में घेर लेंगी?
तितलियां भी कहीं कहीं
क्या नजर आएंगी?
बारिश की बूंदे भी पड़ेंगी
टप! टप!
धूप निकलेगी नए साल में
क्या पिछले साल की तरह
कि वह भी गायब हो जाएगी?
नए साल में मैं जिंदा रहूंगा
या नहीं यह मुझको नहीं पता
नए साल में कोई मुझे रास्ते में रोक लेगा
और मुझे लूट लेगा
इस बात की आशंका भी कम नहीं हुई है
क्या क्या होगा इस नए साल में
मैं अभी से कुछ नहीं बता सकता हूं लेकिन अंदेशा तो है
नए साल में
कुछ घरों को जला दिया जाएगा
कुछ औरतों को कर दिया जाएगा
नंगा सरेआम
किराए का मकान इतना बढ़ जाएगा कि जीना मुश्किल हो जाएगा
नए साल में कई लोग फिर से बेरोजगार होंगे
जोरों से कोई पुकारेगा किसी को
कोई किसी को धकेल देगा समुंदर में कोई किसी को बचाएगा दौड़ते हुए
नए साल में तारे भी गहरी सांस लेंगे
फूलों की भी नींद टूट जाएगी
बादल भी हो जाएंगे बैचैन
अभी से कुछ नहीं कहा जा सकता है
नए साल में
कौन किसकी आवाज़ को खरीद लेगा?
कौन एक अदद पुरस्कार के लिए
फौरन बिक जाएगा?
कौन चुप हो जाएगा
बोलेगा ही नहीं ?
कौन लिखेगा अपने समय का सच
बिल्कुल नहीं पता है
क्या होगा नए साल में?
नया साल नए साल की तरह होगा
या होगा वह कोई जर्जर साल की तरह?
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