90 फीसदी साइबर क्राइम के मामले पुलिस में दर्ज नहीं, लोहिया विधि विवि के एक शोध में खुलासा

अमृत विचार लखनऊ। प्रदेश में साइबर क्राइम के 90 फीसदी मामले पुलिस में दर्ज नहीं होते हैं। बहुत से पीड़ित लोग पुलिस के पास जाने से कतराते हैं। जो जाते भी हैं, उनमें से अधिकांश के मामले दर्ज नहीं किये जाते हैं। सिर्फ 10 फीसदी मामले दर्ज होते हैं। इसका खुलासा डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विवि के पीएचडी छात्र संदीप मिश्रा के शोध में हुआ है। यह शोध लखनऊ, बस्ती व गाजियाबाद में किया गया है।
300 लोगों पर किया शोध
शोधार्थी संदीप मिश्रा ने बताया कि शोध में साइबर क्राइम के पीड़ित, गवाह, वकील और पुलिस को शामिल किया। अध्ययन में पाया कि लोगों में जागरूकता की कमी है। पीड़ित लोग मुकदमा दर्ज कराने से डरते हैं। इनमें सबसे ज्यादा लोग बैंक से रुपये कटने के शिकार हैं। यह लोग मोबाइल पर लुभावने व फायदे वाले मैसेज के शिकार हैं। इनमें करीब 90 फीसदी लोग पुलिस की कार्रवाई के डर से मुकदमा दर्ज कराने नहीं जाते हैं।
अपराधियों से कम पढ़े लिखे विवेचक
संदीप ने बताया कि साइबर अपराधों की जांच करने वाली पुलिस सामान्य ग्रेजुएशन पास है। जबकि साइबर अपराधी बीटेक व एमटेक पास हैं। इनके पास आधुनिक तकनीक के कम्पयूटर व अन्य संसाधन हैं। जबकि पुलिस के पास पुराने संसाधन हैं। साइबर अपराध कानून कमजोर होने की वजह से अपराधियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जिसकी वजह से अपराध में इजाफा हो रहा है।
शोधार्थी संदीप ने शोध में साइबर अपराध से निपटने में आ रही वास्तविक समस्याएं उजागर की हैं। लोगों को इससे निपटने और प्रभावी समाधान और सुझाव भी दिये। यह शोध कार्य लोहिया विधि विवि के प्रो.केए पांडे के नेतृत्व में किया है।