रुद्रपुर: गर्भवती-नवजात मौत प्रकरण की जांच को पहुंची पांच सदस्यीय टीम

रुद्रपुर, अमृत विचार। विगत दिनों जिला अस्पताल में प्रसव पीड़ा के दौरान गर्भवती-नवजात मौत प्रकरण को लेकर डीजी हेल्थ सख्त हो गए हैं। डीजी हेल्थ के आदेश पर कुमाऊं निदेशक स्वास्थ्य के साथ पांच सदस्यीय जांच टीम ने जिला अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकों के बयान दर्ज किए। जिसके चलते सुबह से ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मचा रहा।
शनिवार को बस अड्डा कॉलोनी गदरपुर निवासी फईम की पत्नी नगमा को प्रसव पीड़ा होने लगी। हालत बिगड़ने पर परिजन गर्भवती को जिला अस्पताल लेकर आए। आरोप था कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने ऑपरेशन करने की बात कही और ऑपरेशन के बाद परिजनों से बिना बताए आईसीयू में भर्ती कर दिया। कुछ देर बाद चिकित्सकों ने नवजात को मृत घोषित कर दिया, जबकि गर्भवती नगमा की हालत नाजुक बताकर एसटीएच हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया। जिसकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। जिसके बाद परिजनों ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए महिला व नवजात दोनों की मौत का जिम्मेदार ठहराया।
मामले की जानकारी मिलते ही डीजी हेल्थ देहरादून के आदेश पर सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की कुमाऊं निदेशक तारा आर्या पांच सदस्यीय जांच टीम के साथ जिला अस्पताल पहुंची और पीएमएस कार्यालय में बारी-बारी से ड्यूटी में तैनात चिकित्सक व स्वास्थ्य कार्मिकों के बयान दर्ज किए। साथ ही इलाज के दौरान हुई जांच रिपोर्ट व दवाइयों की भी पड़ताल की। इसके अलावा जांच टीम ने गर्भवती व नवजात की मौत की हर पहलू को बारीकी से समझा। आगाह किया कि यदि जांच में लापरवाही पाई जाती है, तो कार्रवाई होगी। इस मौके पर एसीएमओ डॉ. हरेंद्र मलिक, पीएमएस डॉ. राकेश सिन्हा, एलडी भट्ट काशीपुर के सीएमएस डॉ. कामेश राणा, महिला चिकित्साधिकारी कनक लता आदि मौजूद रहे।
नवजात के शरीर पर कटे निशान को लेकर गंभीर दिखी टीम
सोमवार को जिला अस्पताल में प्रसव पीड़ा को लेकर हुए उपचार के दौरान जच्चा व नवजात की मौत जिला अस्पताल प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर रही है। जिस प्रकार मृतका नगमा के परिवार का आरोप था कि नवजात को आईसीयू में ले जाकर उसे कुछ ही देर में मृत घोषित कर दिया गया। साथ ही नवजात के शरीर पर कई कटे के निशान थे। आरोप लगाया था कि यदि नवजात की गर्भाशय में मौत हो गई थी तो ऑपरेशन के बाद गर्भवती की क्यों मौत हुई। आरोप था कि चिकित्सकों ने उपचार और ऑपरेशन से पहले होने वाली जांच व उपचार में लापरवाही दिखाई। शिकायतकर्ता के आरोपों को कुमाऊं निदेशक ने गंभीरता से लिया। यहीं कारण था कि जांच टीम ने ड्यूटी में तैनात चिकित्सक व गर्भवती की जांच रिपोर्ट भी मांगी।
जिला अस्पताल में हुई गर्भवती व नवजात की मौत प्रकरण को स्वास्थ्य निदेशालय देहरादून के डीजी हेल्थ द्वारा गंभीरता से लिया गया है। डीजी हेल्थ के आदेश पर प्रकरण की जांच पांच सदस्यीय टीम के साथ की जा रही है। जांच के बाद रिपोर्ट को डीजी हेल्थ को भेजा जाएगा। यदि जांच में लापरवाही व आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. तारा आर्या, निदेशक कुमाऊं स्वास्थ्य विभाग