अयोध्या: कछुए की पीठ पर पहुंचा मोदी का दान किया ‘यंत्र’

अयोध्या, अमृत विचार। संकल्प की सिद्धि के रूप में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्यता के साथ आकार ले रहा राम मंदिर नित नया इतिहास गढ़ रहा है। ऐसा ही एक इतिहास दीपोत्सव में शिरकत करने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी के परिसर में पूजन-अर्चन तथा दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम के दौरान भी बना। निर्माणाधीन गर्भगृह स्थित ताबें की पाइप …
अयोध्या, अमृत विचार। संकल्प की सिद्धि के रूप में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्यता के साथ आकार ले रहा राम मंदिर नित नया इतिहास गढ़ रहा है। ऐसा ही एक इतिहास दीपोत्सव में शिरकत करने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी के परिसर में पूजन-अर्चन तथा दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम के दौरान भी बना। निर्माणाधीन गर्भगृह स्थित ताबें की पाइप के भीतर पीएम मोदी ने गुप्त रूप से कुछ डाला जो सीधे प्लिंथ व फाउंडेशन के भीतर जमीन में 70 फीट नीचे जाकर कछुए की पीठ पर पहुंच गया। पीएम ने तांबें की पाइप में कोई धातु का यंत्र डाला अथवा सिक्का, यह केवल उन्हीं को पता है। बाकी के लिए यह रहस्य हजारों सालों तक रहस्य ही बना रहेगा।
छोटी दीपावली पर मोदी रामलला का दर्शन-पूजन और उनके दरबार में दीप प्रज्ज्वलन के बाद 25 सीढ़ी चढ़कर निर्माणाधीन राम मंदिर का जायजा लेने पहुंचे थे। आन्ध्रा व कर्नाटक के ग्रेनाइट से बने प्लिंथ पर पहुंचे मोदी ने नजरें घुमाकर चारों तरफ बारीकी से मुआयना किया था तथा कार्यदायी संस्था की ओर लगाए गए विभिन्न मंडपों के संकेतक को पढ़ा था। इस दौरान मौजूद अधिकारियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों के मुताबिक गर्भगृह पहुंचे मोदी ने आरती की और रामलला के जन्मस्थान स्थित तांबें की पाइप की आरती और टीका किया।
इसी दौरान उन्होंने गोपनीय रूप से तांबें की पाइप में कोई वस्तु डाली। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय इसकी पुष्टि करते हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपनी तरफ से कोई भेंट रामलला के गर्भगृह स्थित तांबें की पाइप में डाला है। यह चीज क्या थी? धातु का कोई सिक्का था अथवा कोई यंत्र। इस बारे में उनके अलावा किसी को कुछ भी पता नहीं है।
निर्माण में जुटे विशेषज्ञों ने उनको बताया कि आपके द्वारा डाली गई भेंट पाइप के सहारे 70 फीट नीचे चली गई। जहां पहले से धातु का कछुआ स्थापित है। यह पाइप सीधे कछुए के पीठ से ऊपर आई है।
वहीं वास्तुविद् व ज्योतिषाचार्य डा. रामानंद पांडेय का कहना है कि जो कुछ भी डाला होगा, वह अपने संकल्प और आकांक्षा की पूर्ति के लिए डाला होगा। डाली गई चीज विश्वकर्मा यंत्र, वास्तु पुरुष पीठ, समुद्री अर्थात गोमती चक्र अथवा सिक्का भी हो सकता है। जो कुछ भी रहा होगा वह सोने, चांदी, तांबा अथवा अष्टधातु का रहा होगा। असल में क्या था, यह तो केवल पीएम मोदी ही बता सकते हैं।
ये भी पढ़ें-कतर में भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारी हिरासत में, एक को मिल चुका है राष्ट्रपति अवॉर्ड