बरेली: सिमी की तरह नए नाम से न खड़ा हो जाए PFI, मौलाना शहाबुद्दीन ने गृहमंत्री को लिखा पत्र

बरेली, अमृत विचार। सरकार द्वारा पीएफआई पर प्रतिबंध लगने के बाद कट्टरपंथी कहीं नए नाम से दोबारा संगठन न खड़ा कर लें। इसी चिंता के साथ दरगाह आला हजरत से संबंधित संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुस्लिम रिसर्च स्कॉलर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने गृहमंत्री अमित शाह को खत लिखा है। यह …
बरेली, अमृत विचार। सरकार द्वारा पीएफआई पर प्रतिबंध लगने के बाद कट्टरपंथी कहीं नए नाम से दोबारा संगठन न खड़ा कर लें। इसी चिंता के साथ दरगाह आला हजरत से संबंधित संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुस्लिम रिसर्च स्कॉलर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने गृहमंत्री अमित शाह को खत लिखा है।
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जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकार ने पॉपुलर फ्रन्ट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर 27 सितंबर को प्रतिबंध लगाकर अच्छा कदम उठाया है। देश के सुन्नी सूफी बरेलवी मुसलमानों ने हुकूमत के इस फैसले का भरपूर समर्थन किया है। क्योंकि यह संगठन देश भर में अपनी कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार प्रसार कर रहा था।
मौलाना ने याद दिलाते हुए कहा कि हम दो वर्ष से पीएफआई प्रतिबंधित करने की मांग कर रहे थे। पीएफआई पर प्रतिबंध हुकूमत का देर से उठाया गया बेहतर कदम है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में इस्लामिक स्टूडेंट्स ऑफ मूवमेंट (सिमी) पर भी भारत सरकार ने 6 अगस्त 2008 को प्रतिबंध लगाया था।
जिसमें कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। जिसके बाद भूमिगत हुए उन्हीं कट्टरपंथियों ने पीएफआई नाम से दोबारा उसी कट्टरपंथ की बुनियाद पर नया संगठन गठित कर लिया और हुकूमत को भनक भी नहीं लगी। उन्होंने कहा कि सिमी और पीएफआई दोनों ही मुस्लिम नौजवानों को टारगेट कर रहे थे, क्योंकि इनकी विचारधारा कट्टरपंथी थी।
मौलाना ने कहा है कि दस वर्ष में पीएफआई परवान चढ़ गया और खुल्लम खुल्ला देश के हर राज्य और सैकड़ों शहरों में खोल लेते है। साहित्य प्रेस से छपकर लाखों की तादाद में बंटता रहा और सरकारी विभाग को पता भी नहीं चला। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि सिमी प्रतिबंधित होने पर पीएफआई खड़ा कर कट्टरपंथी विचारधारा को परवान चढ़ाया गया अब कहीं फिर से पीएफआई प्रतिबंधित होने के बाद नए नाम से कोई संगठन खड़ा किया जा सकता है। ऐसी घृणित विचारधारा देश व समाज के लिए घातक है।
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