मुरादाबाद में पड़ी थी खिलाफत और असहयोग आंदोलन की नींव

मुरादाबाद में पड़ी थी खिलाफत और असहयोग आंदोलन की नींव

आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। स्वतंत्रता संग्राम में मुरादाबाद की माटी का अलग बखान है। यहीं खिलाफत और असहयोग आंदोलन की नींव पड़ी। 1920 में मोहनदास कर्मचंद गांधी सहित आजादी की लड़ाई के अहम लोग जुटे थे। देश के आजाद होने तक महात्मा गांधी के यहां तीन बार यहां आने के प्रमाण हैं। स्वतंत्रता संग्राम के …

आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। स्वतंत्रता संग्राम में मुरादाबाद की माटी का अलग बखान है। यहीं खिलाफत और असहयोग आंदोलन की नींव पड़ी। 1920 में मोहनदास कर्मचंद गांधी सहित आजादी की लड़ाई के अहम लोग जुटे थे। देश के आजाद होने तक महात्मा गांधी के यहां तीन बार यहां आने के प्रमाण हैं। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के संग्रह में इस बात का विस्तार से उल्लेख है।

वर्ष 1920 में डॉ. भगवान दास की अध्यक्षता में यहां सम्मेलन हुआ। तब यह सम्मेलन महाराजा थियेटर (सरोज सिनेमा) में आयोजित हुआ था। जिसमें असहयोग आन्दोलन की भूमिका तैयार हुई। महात्मा गांधी के साथ पं.मदन मोहन मालवीय, पं.मोती लाल नेहरू, पं.जवाहर लाल नेहरू, डॉ.अन्सारी, हकीम अजमत खां, मौलाना मोहम्मद अली, शौकत अली के उसमें शामिल होने की बातें सेनानियों के घर वाले करते हैं। सेनानी साहू रमेश कुमार के बेटे सुशील साहू अपने पिता से सुने किस्से को लेकर विस्तार से बातें बताते हैं।

उधर, अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के महामंत्री धवल दीक्षित एकत्रित इतिहास के आधार पर कहते हैं कि मुरादाबाद से ही असहयोग आन्दोलन की चर्चा शुरू हुई थी। जिसे बाद में कोलकाता अधिवेशन में इस प्रस्ताव को पारित किया गया। जबकि इस प्रस्ताव को नागपुर के वार्षिक अधिवेशन में अंतिम मुहर लगी थी। खिलाफत एवं असहयोग आंदोलन संबंधी गिरफ्तारियां सन 1921 के आखिर में शुरू हुईं। सन 1922 तक मुरादाबाद, सम्भल, अमरोहा, हसनपुर तथा चन्दौसी के लड़ाके जेल गए।

मुरादाबाद में पहले बनवारी लाल रहबर की गिरफ्तारी के प्रमाण हैं। बाद में जफर हुसैन बास्ती, अशफाक हुसैन मुख्तार की गिरफ्तारी हुई। सम्भल से मौलवी मुहम्मद इस्माइल, लाला चंदूलाल (सिरसी) चौधरी रियासत अली खां, मास्टर रूपकिशोर, अमरोहा से नाथूराम वैद्य, बाबूलाल सर्राफ, डॉ.नरोत्तमशरण, छिद्दाउल्ला, अशफाक अहमद और मुमताज अली पकड़े गए। रजबपुर से लाला मुन्नीलाल, शेख मुहम्मद अफजल, चंदौसी से लाला लक्ष्मीचंद्र, लच्छू भगत, मुंशी लाल तथा सादिक की गिरफ्तारी के प्रमाण हैं। दस्तावेजी प्रमाण है कि अहमदाबाद अधिवेशन से लौटने पर रामशरण एवं शंकरदत्त, भगवत शरण, मुमताज पकड़ लिए गए। जबकि, अंग्रेजी प्रदर्शनी के बहिष्कार में अलीमुद्दीन को जेल में डाल दिया गया। किताब में इस बात की चर्चा है कि चौरी-चौरा कांड के बाद महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया था। आंदोलन के स्थगित होते ही कांग्रेस का संगठन जिले भर में फैल गया।

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