साइबर अपराध

जिस तरीके से समाज में बच्चों यानी 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों को लेकर सोशल मीडिया में साइबर अपराध बढ़े हैं, वह चिंता का विषय है। इससे जहां एक ओर बच्चों के औसत चरित्र का पतन हो रहा है, वही सामाजिक अपराध भी बढ़ रहे हैं। शिक्षा के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा …
जिस तरीके से समाज में बच्चों यानी 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों को लेकर सोशल मीडिया में साइबर अपराध बढ़े हैं, वह चिंता का विषय है। इससे जहां एक ओर बच्चों के औसत चरित्र का पतन हो रहा है, वही सामाजिक अपराध भी बढ़ रहे हैं। शिक्षा के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा है। इंटरनेट दुधारी तलवार की तरह से है। यदि सही इस्तेमाल हुआ तो सही वरना यह काफी घातक होता है।
बाल मनोविज्ञान बताता है कि बच्चों में जब हार्मोनल परिवर्तन हो रहा होता है, उस समय अचानक उनकी जिज्ञासाएं बढ़ जाती है और वे नए-नए प्रयोगों की ओर उन्मुख होते हैं ऐसे में सरकार, अध्यापकों और अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। मामले की गंभीरता को समझते हुए केन्द्र सरकार ने सोशल मीडिया में पोर्नोग्राफी की उभरती चुनौतियों और इसका समाज तथा बच्चों पर दुष्प्रभाव विषय पर राज्यसभा की एडहाक कमेटी से एक अध्ययन कराया।
रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अश्लीलता परोसे जाने से बच्चों पर काफी गलत असर पड़ा है और उसमें अपराध की प्रवृति बढ़ी है। सरकार ने इन्फाॅरमेशन टेक्नॉलोजी कानून 2021 के तहत कड़े प्रावधान किए हैं। सरकार ने कहा है कि शिकायतों को दर्ज करने तथा उन पर कड़ी कार्रवाई के लिए एक प्रणाली विकसित की जाए।
यह भी कहा गया है कि संबोधित तंत्र सीधे उपभोक्ता से संपर्क करे, न कि सार्वजनिक रूप से कोई ऐसी चीज साझा करे जो हानिकारक हो। बच्चों से संबंधित जो खतरनाक साम्रगी इंटरनेट पर डाली जाए उसे रोकने की तकनीकि प्रणाली विकसित की जाए। इलेक्ट्रानिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक जागरुकता कार्यक्रम की भी शुरुआत की है जिसमें सभी इंटरनेट उपभोक्ताओं की इस बात को लेकर जागरूक किया जाएगा कि वे इंटरनेट के इस्तेमाल के समय मीडिया एथिक्स का पूरा ध्यान रखें तथा अफवाहों या भ्रामक खबरों को सोशल मीडिया में न डाले।
आईएसईए नाम के इस कार्यक्रम के तहत एक वेबसाइट भी शुरु की गई है। गृह मंत्रालय भी बच्चों और महिलाओं के विरूद्ध साइबर आपराध की रोकथाम को लेकर 223.19 करोड़ रूपए की लागत से एक योजना शुरु करने जा रहा है। योजना के तहत साइबर अपराध सलाहकारों की सेवाएं ली जाएगी और पूरे देश में करीब 19 हजार पुलिस कामियों को साइबर अपराध के रोकथाम का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उम्मीद है इन प्रयासो के सार्थक परिणाम शीघ्र ही आएंगे।
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