रुद्रपुर: साझेदार पर लगाया मुकदमे में झूठा फंसाने का आरोप, बचाने के लिए मांगे 25 लाख रुपये

रुद्रपुर: साझेदार पर लगाया मुकदमे में झूठा फंसाने का आरोप, बचाने के लिए मांगे 25 लाख रुपये

रुद्रपुर, अमृत विचार। फर्म के साझेदार पर बैंक लिमिट की एक करोड़ रुपये की धनराशि जमा नहीं करने का आरोप है। साथ ही पीड़ित को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने और झूठे मुकदमे से बचाने के लिए 25 लाख रुपये की मांग करने का आरोप भी है। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर …

रुद्रपुर, अमृत विचार। फर्म के साझेदार पर बैंक लिमिट की एक करोड़ रुपये की धनराशि जमा नहीं करने का आरोप है। साथ ही पीड़ित को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने और झूठे मुकदमे से बचाने के लिए 25 लाख रुपये की मांग करने का आरोप भी है। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है।

पुरानी इलाहाबाद बैंक गली स्थित एचपी इलेक्ट्रोनिक्स के हरपाल सिंह ने कोर्ट में दिये शिकायती पत्र में बताया कि वह एचपी इलेक्ट्रोनिक्स में साझेदार है। उसकी फर्म में कोलड़िया बागवाला निवासी आशुतोष नेगी आता जाता रहता था। इस दौरान वह पीड़ित को धनवान होने का एहसास करता था और अपने पास कई बंगले व गाड़ियां होना बताता था। साथ ही उसने बताया कि उसकी बैंक में भी अच्छी पहचान है और वह ऋण स्वीकृत करा सकता है। हरपाल ने बताया कि उस समय उसकी फर्म अच्छे से संचालित हो रही थी। उसमें और अधिक धन की आवश्यकता थी।

जिस पर उसने आशुतोष नेगी के सामने फर्म में पार्टनरशिप का प्रस्ताव रखा। वर्ष 2016 में उसे 49 प्रतिशत का पार्टनर बनाया। पूर्व पार्टनर को एक प्रतिशत का स्लीपिंग पार्टनर और 50 प्रतिशत का वह स्वयं साझेदार बन गया। इसके बाद आशुतोष नेगी ने फर्म के नाम पर 90 लाख रुपये की सीसी लिमिट स्वीकृत करा दी। कहा कि उसकी संपत्ति पर बैंक ने लिमिट स्वीकृत की है। इसलिए वह बैंक से लेनदेन व अन्य कार्य करेगा। उस पर भरोसा कर पीड़ित एकमुश्त हस्ताक्षर कर देता था।

कुछ समय बाद उसने गिरीश यादव को फर्म का धन बैंक में जमा करने के लिए रख लिया। फिर उन्होंने हल्द्वानी में भी एक फर्म खोल ली। दोनों फर्मों के रुपये आशुतोष स्वयं बैंक में जमा करने लगा। आशुतोष फर्म के कर्मचारियों को डरा धमकाकर फर्म से नकद धनराशि व उधार मोबाइल भी ले जाने लगा और दूसरों को भी उधार दिलाने लगा। पीड़ित ने जब उससे फर्म में स्टॉक के लिए धन निवेश करने को कहा तो साझेदारी समाप्त करने की बात बोलने लगा।

कहा कि वह बैंक लिमिट की ऋण स्वयं वहन करेगा। साझेदारी समाप्त करने के बाद उसने मोबाइल कंपनी को लिखित में पत्र देकर कहा कि पीड़ित द्वारा धोखाधड़ी से बैंक लिमिट से धनराशि आहरित की और पीड़ित के साथ कोई डिलिंग न की जाये। कंपनी द्वारा डिलिंग बंद करने पर पीड़ित की फर्म को नुकसान होने लगा। जिस पर पीड़ित ने आशुतोष को बैंक की धनराशि जमा करने को कहा। तो वह झूठे मुकदमे में फंसाने और 25 लाख रुपये बैंक के साथ धोखाधड़ी करने के लिए मंगाने लगा। जबकि बैंक की धनराशि का लेनदेन आशुतोष द्वारा स्वयं किया गया।

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