बरेली: नहीं उतर रहा बुखार तो कराएं काली पीलिया की जांच, गर्भवतियों पर एनीमिया का खतरा

बरेली: नहीं उतर रहा बुखार तो कराएं काली पीलिया की जांच, गर्भवतियों पर एनीमिया का खतरा

बरेली, अमृत विचार। मौसम का मिजाज बदला है ऐसे में सरकारी के साथ ही निजी अस्पतालों में भी बेड फुल हो रहे हैं, हर वर्ग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, विभागीय डाटा के अनुसार की बात करें तो डायरिया, मलेरिया के साथ ही काली पीलिया भी तेजी से पांव पसार रहा है, आलम …

बरेली, अमृत विचार। मौसम का मिजाज बदला है ऐसे में सरकारी के साथ ही निजी अस्पतालों में भी बेड फुल हो रहे हैं, हर वर्ग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, विभागीय डाटा के अनुसार की बात करें तो डायरिया, मलेरिया के साथ ही काली पीलिया भी तेजी से पांव पसार रहा है, आलम यह है कि काली पीलिया यानि हेपेटाइटिस के मामले में सूबे में बरेली दूसरा स्थान पर काबिज में है। महिलाओं पर एनीमिया का खतरा मंडरा रहा है।

जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके गुप्ता के अनुसार पिछले माह शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई थी, उसमें जिले में हेपेटाइटिस बी और सी के कुल 105 मरीज सामने आए थे, लेकिन इस माह रोगियों की संख्या बढ़कर 169 पहुंच गई है। इसमें 64 मरीज हेपेटाइटिस बी तो 105 मरीज हेपेटाइटिस सी से ग्रसित मिले हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने का एक मुख्य कारण यह भी है कि जिले में मरीजों की जांचों का क्रम भी लगातार बढ़ रहा है।

क्या होता है काला पीलिया
डॉ. गुप्ता के अनुसार काला पीलिया एक आम यकृत विकार हैं, जो कि कई असामान्य चिकित्सा कारणों की वजह से से हो सकते हैं। काला पीलिया होने पर किसी व्यक्ति को सिर दर्द, लो-ग्रेड बुखार, मतली और उल्टी, भूख कम लगना, त्वचा में खुजली और थकान आदि लक्षण होते हैं। त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाता है। इसमें मल पीला और मूत्र गाड़ा हो जाता है। इस प्रकार के लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेकर जांच कराएं।

गर्भवतियों पर एनीमिया का खतरा

स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मृदुला शर्मा के अनुसार गर्भावस्था के दौरान उचित खानपान और देखभाल न होने से महिला के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। इसलिए गर्भवती महिलाएं एनीमिया की गिरफ्त में आ रही हैं। लगातार अनदेखी जच्चा-बच्चा के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि घर के माहौल सुगम रखें और खानपान का विशेष ध्यान रखें।

बच्चों का रखें विशेष ध्यान
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनुपम शर्मा के अनुसार बड़ों की तुलना में बच्चे गर्मी में डायरिया की गिरफ्त में अधिक आते हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को बाहर के खाद्य पदार्थ का सेवन बिल्कु़ल न कराएं, समय-समय पर पानी पिलातें रहे। जिस बोतल से बच्चा दूध पी रहा उसको समय-समय पर उबालें जरूर। बच्चों को धूप में अधिक देर तक न रहने दें।
फुल आस्तीन के पहने कपड़े, घर रखें साफ

आईएमए अध्यक्ष डॉ. विमल भारद्वाज के अनुसार मलेरिया का प्रकोप बढ़ने लगा है। इसलिए जरूरी है कि घर से निकलते वक्त फुल आस्तीन के कपड़े पहनें। वहीं घर के आसपास सफाई व्यवस्था का विशेष ध्यान रखें, घर में कहीं भी पानी जमा न होने दें, रात में सोते समय मच्छर दानी का प्रयोग करें।

गर्भावस्था में खून की कमी ( एनिमिया ), मां व शिशु , दोनों के लिए हानिकारक है। गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन का लेवल कम से कम 11 ग्राम होना चाहिए।

गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें-
1.हरी सब्जियां आयरन से युक्त होती हैं। इन्हें अपने भोजन में जरूर शामिल करें। पालक, कच्चा केला व ब्रॉकली आयरन से भरपूर हैं। गाजर, चुकंदर व पालक का सूप लें सकते हैं।

2.खजूर और अंजीर में आयरन की उच्च मात्रा होती है जो हीमोग्लोबिन के लेवल को बढ़ाने में मदद कर सकता है। अन्य सूखे मेवे जैसे कि अखरोट किशमिश और बादाम एक उचित मात्रा में खा सकते हैं।
3. गुड़ ( अगर मधुमेह नहीं है तब ) व भुने चने का सेवन करें।

4.दालों में आयरन और प्रोटीन खूब होता है। दाल भरपूर मात्रा में लें। सलाद या सूप में दालों को शामिल करके खा सकते हैं।
5.प्रोटीन के लिए दूध, दही व पनीर का सेवन करें।

6.ताजे फल जैसे कि अनार, आडू, अमरूद और कीवी एनिमिया में लाभदायक हैं। इन में आयरन बहुत होता है।
7.संतरा भी फ़ायदेमंद है जिसमें विटामिन सी होता है जो इम्यूनिटी को बढ़ाता है और हीमोग्लोबिन के लेवल को भी बढ़ाता है।

8.अंडा की सफ़ेदी वफिश और चिकन भी प्रोटीन के लिए उपयुक्त हैं।
9.आयरन व फोलिक ऐसिड की टैबलेट ज़रूर लें।

10.प्रोटीन सप्पलिमेंट जैसे पाउडर या बिस्कुट्स साथ में लें।

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