कानपुर: गंगा मेला पर जमकर बरसा गुलाल, हुरियारों ने ऊंट पर बैठकर खेला रंग

कानपुर। सात दिन तक होली खेलने और सातवें दिन सुबह से दोपहर तक रंग से सराबोर रहा। करीब 80 साल पुरानी परंपरा साल में एक बार जी उठी। शहर के पुराने क्षेत्रों में भारी हुजूम के साथ रंगों का ठेला निकाला गया और मटकी भी फोड़ी गयी। अनुराधा नक्षत्र के दिन हुरियारों ने ऊंट पर …
कानपुर। सात दिन तक होली खेलने और सातवें दिन सुबह से दोपहर तक रंग से सराबोर रहा। करीब 80 साल पुरानी परंपरा साल में एक बार जी उठी। शहर के पुराने क्षेत्रों में भारी हुजूम के साथ रंगों का ठेला निकाला गया और मटकी भी फोड़ी गयी।
अनुराधा नक्षत्र के दिन हुरियारों ने ऊंट पर बैठकर रंग खेला। यह ऐतिहासिक पर्व के रूप में बनाया गया। रज्जन बाबू पार्क से हुरियारों का काफिला शुरू हुआ तो बिरहाना रोड, जनरल गंज, मूलगंज, चौक, मेस्टन रोड होते हुए कमला टावर आदि जगह से ठेला गुजरा। रास्ते में लोगों ने हुरियारो पर पुष्पवर्षा की। यह आजादी के दीवानों के सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है।
यह हुरियारो का जुलूस कानपुर के करीब एक दर्जन मोहल्ले में घूमता हुआ दोपहर के दो बजे रज्जन बाबू पार्क में आकर अगले साल तक के लिए थम गया। दरअसल होली के बाद होली का नजारा तो सिर्फ कानपुर में ही देखा जा सकता है।
इस शहर में रंग खेलना होली के दिन से गंगा मेला तक जारी रहा। होली पर रोक लगाने के फिरंगी हुकूमत के फैसले के विरोध में एकजुटता दिखाते हुए कानपुर में गंगामेला आयोजित गया था तब से यह परंपरा पड़ गयी। शाम को गंगा के सरसैया घाट पर विशाल मेला आयोजित किया जाता है।
पढ़ें- अखिलेश यादव ने बीजेपी पर कसा तंज, कहा- पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम का कारण सरकार की गलत नीतियां हैं