आम का वृक्ष

आम का वृक्ष

हिंदू संस्कृति में आम के वृक्ष को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। हिंदुओं के सारे धार्मिक एवं सामाजिक कृत्य आम की पत्तियों से अथवा लकड़ी के माध्यम से किए जाते हैं। बंदनवार सजाने में आम की पत्तियों का प्रयोग होता है तो यज्ञ में कलश स्थापना ब्रह्म के लिए की जाती है उस कलश …

हिंदू संस्कृति में आम के वृक्ष को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। हिंदुओं के सारे धार्मिक एवं सामाजिक कृत्य आम की पत्तियों से अथवा लकड़ी के माध्यम से किए जाते हैं। बंदनवार सजाने में आम की पत्तियों का प्रयोग होता है तो यज्ञ में कलश स्थापना ब्रह्म के लिए की जाती है उस कलश पर आम की टहनी रखी जाती है।

तथा यज्ञ की जो हवन की लकड़ी होती है। वह भीआम की सूखी लकड़ियां होती है । वस्तुतः गृहस्थी के सारे सामान जो लकड़ी के होते हैं ।वह यदि आम के हैं तो शुभ माने जाते हैं ।विवाह में भी बहू के आंचल में आम दिया जाता है। वस्तुतः आम रजोगुण एवं सृजन का प्रतीक है इसीलिए ब्रह्म कलश में आम की टेरी रखी जाती है ।जहां आम ब्रह्म का सूचक है।वही आंवला विष्णु का सूचक है और सतोगुणी है। इसीलिए आम के वृक्ष के साथ ही साथ आंवले का भी वृक्ष लगाना चाहिए क्योंकि सृजन और पोषण साथ ही साथ रहे अर्थात ब्रह्मा और विष्णु का साहचर्य।

तारकासुर के वध के लिए जब देवता कामदेव की उपासना करते हैं और कामदेव शंकर की समाधि को तोड़ने का प्रयास करता है ।तो सबसे पहले वह अपने आध्यात्मिक प्रभाव का प्रयोग करता है। जिसमें परास्त होता है। तदुपरांत वह अपने सह धर्मी बसंत ऋतु का प्रयोग करता है जिसमें कोयल मयूर अप्सराओं एवं वनस्पतियों के सौंदर्य का उपयोग होता है।

परंतु इसमें भी असफल हो जाता है। अंत में कामदेव अपमानित महसूस करके अपने शरण स्थली आम का प्रयोग करता है। और आम की शाखा पर बैठकर अपने पांच बान भगवान शंकर पर मारता है ।परिणाम स्वरूप भगवान की समाधि टूट जाती है ।और भगवान शंकर उसको देखते हैं तो वह आम के पल्लव में में छुपा हुआ है। और भस्म कर देते हैं। कृपया देखें रामचरितमानस बालकांड दोहा 86 के नीचे चौपाई देखी रसाल विटप बर शाखा तेहीं पर चड़ेहूं मदन मनमाखा। सुमन चाप निज सर संधाने अतिरिसि ताकि श्रवण लगी ताने।

हमारे धर्म शास्त्रों में एक आम का वृक्ष लगाना और पोषण करके बड़ा बना देना उसका फल 100 पुत्र की उत्पत्ति एवं पोषण के बराबर है अथवा 100 यज्ञ के बराबर है। बसंत ऋतु में जब आम में बौर आते हैं तो वह समय अत्यंत सौंदर्य एवं माधुर्य का होता है जब तक आम में अमिया नहीं आती इतनी मदमातीसुगंध होती है। जहां आम फलों का राजा है वहीं पर यज्ञ की बंदनवार समिधा से लेकर प्रसाद के रूप में भी प्रयुक्त होता है। आम कामदेव का घर भी है। आम के बौर कामदेव के धनुष कहे गए है। इतना ही नहीं आम के वृक्ष को लगाना मुक्ति का मार्ग भी है।

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