बरेली: मैदान न होने से खेतों में अभ्यास करने को मजबूर खिलाड़ी

 बरेली: मैदान न होने से खेतों में अभ्यास करने को मजबूर खिलाड़ी

बरेली,अमृत विचार। गांवों में रहने वाले खिलाड़ी संसाधनों की कमी के कारण खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। खिलाड़ियों के लिए फुटबाल, वालीबॉल, हॉकी और क्रिकेट का अभ्यास करने की सुविधा नहीं है। खिलाड़ियों को प्रशासनिक सहयोग भी नहीं मिल पा रहा है। उन्हें खेलों के आयोजन के लिए आपस में चंदा करना पड़ता …

बरेली,अमृत विचार। गांवों में रहने वाले खिलाड़ी संसाधनों की कमी के कारण खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। खिलाड़ियों के लिए फुटबाल, वालीबॉल, हॉकी और क्रिकेट का अभ्यास करने की सुविधा नहीं है। खिलाड़ियों को प्रशासनिक सहयोग भी नहीं मिल पा रहा है। उन्हें खेलों के आयोजन के लिए आपस में चंदा करना पड़ता है।

ब्लाक वार मिनी स्टेडियम तो बनाए गए हैं, लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर संसाधनों की कमी है। जिस वजह से ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पा रहा है। सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं को निखारने के लिए खेल मैदान बनवाए जा रहे हैं। जिले में 1193 में से मात्र 400 ग्राम पंचायतों में ही मैदान बने हुए हैं।

जिले के आलमपुर जाफराबाद, बहेड़ी, भदपुरा, भोजीपुरा, भुता, बिथरी चैनपुर, फरीदपुर, फतेहगंज पश्चिमी, क्यारा, मझगवां, मीरगंज, नवाबगंज, रामनगर, रिछा व शेरगढ़ विकासखंड में हाल ही में मिनी स्टेडियम बनाए गए हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि अभ्यास की कमी के कारण उन्हें प्रतियोगिताओं में मात खानी पड़ती है।

खेल मैदान नहीं होने के कारण अभ्यास करने में परेशानी होती है। उन्हें आसपास के खेल मैदान में जाकर खेलना पड़ता है। कुछ गांवों में स्कूलों का मैदान तो है लेकिन बाउंड्री बन जाने व विद्यालय बंद होने के बाद गेट में ताला लग जाता है, जिससे वह वहां खेलने नहीं पहुंच पाते हैं। खेत खाली रहने पर ग्रामीण खिलाड़ी उसी में अभ्यास करते हैं।

जिलास्तर पर होता है खेलों का आयोजन
कला संस्कृति एवं युवा विभाग के तत्वावधान में वर्ष में एक या दो बार जिलास्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें गांव से लेकर स्कूल तक के बच्चे आकर अपनी प्रतिभा प्रदर्शन करते हैं। इन खेलों में जिलास्तर पर चयनित होने के बाद उन्हें राज्य स्तर की प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिलता है। इन खेलों के आयोजन में प्रशासन बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है और चयनित खिलाड़ियों को सम्मानित कर उन्हें पदक व प्रमाण पत्र प्रदान करता है।

मैदान का समतलीकरण करा की इतिश्री
फरीदपुर ब्लाक में मनरेगा के तहत मिनी स्टेडियम बनाया गया है। यहां न तो बाउंड्री वाल बनी है और न ही खिलाड़ियों के बैठने और पेयजल की भी समुचित व्यवस्था है। प्रतियोगिताएं आयोजित होने के बाद लोग वहां पर गंदगी डालने लगते हैं। देखरेख के अभाव में बना मिनी स्टेडियम जर्जर हाल में है।

ग्राम पंचायत स्तर पर खेल मैदान बनवाए जा रहे हैं। साथ ही समय-समय पर प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है। खिलाड़ियों की समस्याओं को देखते हुए उनका समाधान कराए जाने का प्रयास किया जा रहा है। —विवेकचंद्र श्रीवास्तव, उप निदेशक युवा कल्याण

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