अयोध्या: हे राम! मंदिर निर्माण वाला इलाका रामकोट तो कुछ और ही संकेत दे रहा

अयोध्या। निगाहें देश और दुनियां की अयोध्या पर हैं। लोग विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर हुए मतदान के बाद परिणाम को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली अयोध्या के सामने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की करहल सीट व गोरखपुर सदर की सीएम योगी आदित्यनाथ की सीट भी …
अयोध्या। निगाहें देश और दुनियां की अयोध्या पर हैं। लोग विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर हुए मतदान के बाद परिणाम को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली अयोध्या के सामने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की करहल सीट व गोरखपुर सदर की सीएम योगी आदित्यनाथ की सीट भी बौनी नजर आती है। अयोध्या का नगर क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार नगर क्षेत्र में वोटों का कड़ा सूखा पड़ा रहा। जीजीआईसी व रामकोट जैसे बूथ पर बहुत कम वोट पड़े हैं।
अयोध्या विधानसभा का रामकोट वही स्थान है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकर राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी थी। फिलहाल वोटरों ने तो अपना गुल खिला दिया है, लेकिन इधर अटकलों को हवा तब और मिल गई जब जिलाधिकारी आवास के बाहर लगे बोर्ड रंग बदलने लगे। अब पूरे देश की नजर है कि अयोध्या में चुनाव परिणाम 10 मार्च को क्या होने जा रहा है?
बीती 27 फरवरी को मतदाताओं ने प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला लॉक कर दिया है। अयोध्या विधानसभा के 414 बूथों पर 2 लाख 16 हजार 231 लोगों ने अपना मत डाला है। माना जाता है कि नगर क्षेत्र भाजपा का ही होता है। अगर यह बात सही रही तो वोटिंग परसेंटेज कुछ और ही इशारा कर रहे हैं। दरअसल, इस बार शहरी क्षेत्रों में कम और ग्रामीण इलाकों में जमकर वोट बरसे हैं। इन्हीं वोटों पर प्रमुख चार दल अपनी-अपनी कयासबाजियां लगा रहे हैं।
अयोध्या सीट पर 2017 की अपेक्षा लगभग 1.25 प्रतिशत कम वोटिंग 2022 के चुनाव में हुई है। और इस सीट पर नगर क्षेत्र में मतदान प्रतिशत देहात की अपेक्षा अप्रत्याशित कम हुए हैं। सबसे कम वोट सिविल लाइंस स्थित जीजीआईसी के बूथ संख्या 18 पर पड़े हैं। यहां 1126 में 347 वोट ही पड़े। इसी केंद्र के बूथ संख्या 14 पर 1045 में 345 वोट डाले गए। शहर का सबसे पॉश इलाका माना जाने वाला सिविल लाइंस में शहर का बड़ा और रसूख वाला तबका रहता है।
इसके बावजूद यहां वोटों की कम संख्या कुछ अलग ही गवाही दे रही है। यहीं पास के ही एडी बेसिक कार्यालय में बने बूथ संख्या 19 पर 1145 में से 345 वोट ही पड़े। अयोध्या धाम के रामकोट के बूथ संख्या 178 के कक्ष संख्या 1 में 922 में सिर्फ 303 वोट ही पड़े। इसके उलट शहर से सटे देहात क्षेत्रों में जमकर वोटों की बारिश हुई। मक्खापुर के बूथ संख्या 204 पर 723 में से 610 वोट पड़े। बूथ संख्या 231 गंजा में 447 में 374 वोट डाले गए। तिहुरा पश्चिमी उत्तरी बूथ संख्या 382 पर 932 में से 779 वोट डाले गए।
नगर निगम का विस्तार भाजपा के गले की हड्डी
योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या और फैजाबाद नगर पालिकाओं को मिलाकर अयोध्या नगर निगम बनाया। चुनाव और वोट के लिहाज से इसे भाजपा का ब्रह्मास्त्र माना जा रहा था, लेकिन नगर निगम की सीमा के विस्तार में जो 41 गांव इसमें जोड़े गए, उन गांवों में भाजपा का चुनावी रथ फंसा हुआ माना जा रहा है। दरअसल उन ग्राम पंचायतों की प्रधानी तो गई ही गांव सभा निधि भी बंद हो गई और नगर निगम से कुछ मिला भी नहीं। इन गांवों में भी जमकर वोट पड़े हैं। औसतन 70 से 72 फीसद वोट पड़े हैं।
जागरुकता भी काम न आई
प्रशासन और भाजपा के वरिष्ठ नेता भी सोच में पड़ गए हैं कि नगर क्षेत्र में इतनी वोटिंग उन्हें कहां से कहां ले जाएगी। जिला प्रशासन ने भी मतदाताओं को जागरूक करने के लिए तरह-तरह के अभियान चलाए और यह सारे अभियान नगर क्षेत्र में सबसे प्रभावी ढंग से चलाए गए, लेकिन उसका भी नगर क्षेत्र पर कोई असर नहीं पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में मामला उलटा ही रहा। लोग घरों से निकले और मतदान करने के बाद ही जलपान किया।
2017 में ऐसे मिले थे वोट
- भाजपा 1,07,014
- सपा 56,574
- बसपा 39,554
नोट: 2017 में 61.72 फीसद और 2022 में 60.47 फीसद मतदान हुआ।