मुरादाबाद: इंटरलॉकिंग से बढ़ जाएगी ट्रेनों की गति

मुरादाबाद, अमृत विचार। आम बजट का विभागीय अंशदान गजरौला-मोअज्जमपुर रेल सेक्शन का रूप परिवर्तित करने वाला है। इस सेक्शन में इंटरलॉकिंग का कार्य जारी है। जबकि, परिक्षेत्र के पांच प्रमुख स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। स्टेशन भवन निर्माण में यात्री विश्रामालय और अन्य सुविधाओं का विस्तार होगा। 95 किलोमीटर लंबे सेक्शन में पांच …
मुरादाबाद, अमृत विचार। आम बजट का विभागीय अंशदान गजरौला-मोअज्जमपुर रेल सेक्शन का रूप परिवर्तित करने वाला है। इस सेक्शन में इंटरलॉकिंग का कार्य जारी है। जबकि, परिक्षेत्र के पांच प्रमुख स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। स्टेशन भवन निर्माण में यात्री विश्रामालय और अन्य सुविधाओं का विस्तार होगा।
95 किलोमीटर लंबे सेक्शन में पांच प्रमुख स्टेशन भवन का निर्माण जारी है। सेक्शन के मंडी-धनौरा, चांद सियाऊ, हल्दौर, बिजनौर और बसी किरतपुर का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। जबकि, नारायण जंक्शन, झालरा, खारीझालू, अमेहरा, सिसोना, बागरपुर, बकैना, चुचैला कला, शेरपुर और गजरौला जंक्शन की भी सूरत संवरेगा। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस सेक्शन के इंटरलॉक हो जाने की वजह से उत्तराखंड की रेल सेवा को और मजबूती मिलेगी। यानी कि यात्री सुविधाओं के विस्तार के साथ ट्रेनों की गति भी बढ़ जाएगी।
सूत्रों की मानें तो अभी मोअज्जमपुर-गजरौला सेक्शन में ट्रेनों की स्पीड अधिकतम 50 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि कोहरा के सीजन में इन स्टेशनों के बीच अधिकतम 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। साल के आखिर यानी दिसंबर तक यह कार्य पूरा हो जाएगा। जिससे अगले रेलवे सारणी लागू होने के बाद इस सेक्शन में ट्रेनों की स्पीड दोगुनी हो जाएगी।
जानकारों का कहना है कि इंटरलॉकिंग सेक्शन में ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत हो जाता है। ऐसे में गजरौला-मोअज्जमपुर सेक्शन में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों को चलाया जा सकेगा। बजट में बाकी धनराशि जारी कर दी गई है, जिससे रेल सेवा में व्यापक परिवर्तन दिखेगा।
ये है रेल लाइन इंटरलाकिंग
ट्रेनों के संचालन का यह कम्प्यूटरीकृत संसाधन है। मैनुअल प्रणाली से यह हमें सुरक्षा की और गारंटी देता है। रेल पटरी बदलने, सिग्नल और परिचालन के सभी कार्य आनलाइन होते हैं। यह रेलवे के परिचालन प्रणाली की नवीनतम उपाय है। इससे रेलवे क्रासिंग भी स्वचालित होगा। ट्रैक की सुरक्षा और ट्रेनों की केंद्रीयकृत निगरानी की गारंटी देता है।
खंड के विकास और इंटरलाकिंग का कार्य जारी है। दिसंबर तक यह कार्य पूरा होना है। इसके बाद ट्रेनों की गति बढ़ेगी और यात्रियों को सुरक्षित यात्रा की गारंटी होगी। दो लाइन के इस खंड पर बिजली से ट्रेनों का संचालन जारी है। यह उत्ताखंड राज्य को जोड़ने वाली रेल लाइन है। -अजय नंदन, मंडल रेल प्रबंधक