सकट चाैथ पर तिल का ‘बकरा’ बनाकर यूं करें भगवान गणेश की पूजा, जानें कथा और महत्व

सकट चाैथ पर तिल का ‘बकरा’ बनाकर यूं करें भगवान गणेश की पूजा, जानें कथा और महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सकट चाैथ का व्रत रखा जाएगा। इस दिन विशेष सामग्रियों से भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ये व्रत 21 जनवरी को रखा जाएगा। सकट चौथ की पूजा माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत और जीवन में सुख-समृद्धि की …

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सकट चाैथ का व्रत रखा जाएगा। इस दिन विशेष सामग्रियों से भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ये व्रत 21 जनवरी को रखा जाएगा। सकट चौथ की पूजा माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए करती हैं।

सकट चौथ व्रत पूजा विधि
सकट चौथ के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर साफ कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद आसन पर बैठकर भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान श्रीगणेश को धूप और दीप दिखाना चाहिए। गणेश जी की पूजा के दौरान सीधे हाथ में जलकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। गणेश मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करने चाहिए।

सूर्यास्त के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। गणेश जी की मूर्ति के पास एक कलश में जल भर कर रखें। धूप-दीप, नैवेद्य, तिल, लड्डू, शकरकंद, अमरूद, गुड़ और घी अर्पित करें। तिलकूट का बकरा भी कहीं-कहीं बनाया जाता है। पूजा के बाद बच्चाें से चांदी के सिक्के से तिल से बने बकरे की गर्दन को कटवाते हैं।

सकट चौथ की कथा
मान्यता है कि निर्जला व्रत कर विधि विधान से गणेश जी की पूजा करने से गणपति की कृपा भक्तों पर सदैव बनी रहती है। इसे पीछे ये कहानी है कि मां पार्वती एकबार स्नान करने गईं। स्नानघर के बाहर उन्होंने अपने पुत्र गणेश जी को खड़ा कर दिया और उन्हें रखवाली का आदेश देते हुए कहा कि जब तक मैं स्नान कर खुद बाहर न आऊं किसी को भीतर आने की इजाजत मत देना।

गणेश जी अपनी मां की बात मानते हुए बाहर पहरा देने लगे। उसी समय भगवान शिव माता पार्वती से मिलने आए लेकिन गणेश भगवान ने उन्हें दरवाजे पर ही कुछ देर रुकने के लिए कहा। भगवान शिव ने इस बात से बेहद आहत और अपमानित महसूस किया। गुस्से में उन्होंने गणेश भगवान पर त्रिशूल का वार किया। जिससे उनकी गर्दन दूर जा गिरी।

स्नानघर के बाहर शोरगुल सुनकर जब माता पार्वती बाहर आईं तो देखा कि गणेश जी की गर्दन कटी हुई है। ये देखकर वो रोने लगीं और उन्होंने शिवजी से कहा कि गणेश जी के प्राण फिर से वापस कर दें ।

इसपर शिवजी ने एक हाथी का सिर लेकर गणेश जी को लगा दिया । इस तरह से गणेश भगवान को दूसरा जीवन मिला । तभी से गणेश की हाथी की तरह सूंड होने लगी. तभी से महिलाएं बच्चों की सलामती के लिए माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का व्रत करने लगीं।

सकट चौथ तिथि और शुभ मुहूर्त 2022
हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार हर वर्ष सकट चौथ का व्रत माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाता है। इस वर्ष चतुर्थी तिथि 21 जनवरी की सुबह 08 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 22 जनवरी की सुबह 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगी।

शुभ योग
सकट चौथ के दिन बहुत ही शुभ योग बनने जा रहा है। पंचांग के अनुसार इस बार सकट चौथ पर सौभाग्य नाम का शुभ योग बनेगा। यह शुभ योग 21 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 06 मिनट तक रहेगी फिर उसके बाद शोभन योग शुरू हो जाएगा। सौभाग्य योग पर शुभ कार्य और पूजा करने पर हमेशा सफलता प्राप्ति होती है। सकट चौथ पर अभिजीत मुहूर्त का समय दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।

चंद्रोदय का समय
चतुर्थी तिथि पर व्रत रखने के बाद चंद्रमा का दर्शन अवश्य किया जाता है। ऐसे में 21 जनवरी की रात को सकट चौथ पर चंद्रमा 09 बजकर 05 मिनट पर होगा। ऐसे में जो महिलाएं सकट चौथ का व्रत रखेंगी वे पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन करते हुए जल अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए भगवान गणेश से आशीर्वाद प्राप्त करें। इसके बाद व्रत का पारण करें।

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